आवश्यक अभिलेख

एक प्राथमिक/ उच्च प्राथमिक विद्यालय हेतु आवश्यक अभिलेख संधारण

किसी भी स्तर के विद्यालय को समस्त रजिस्टरों व अभिलेखों का संधारण नियमानुसार करना आवश्यक है।
प्रत्येक कार्यालय में संधारित अभिलेखों की एक सूची तैयार कर अभिलेख के मुख्य आवरण पर क्रमांक संख्या, नाम, विषय , अवधि सम्बन्धित विवरण दर्ज किया जाता है । अभिलेख के प्रथम पृष्ठ पर उपलब्ध पृष्ठ संख्या का प्रामाणिकरण संस्था प्रधान द्वारा आवश्यक रूप से किया जाना चाहिए ।
अभिलेखों को उनकी परिरक्षक अवधि हेतु विद्यालय कार्यालय में सम्बन्धित अधिकारियों के अवलोकन एवम् कार्यालय कार्य हेतु सुरक्षित रखा जाना चाहिए ।
अभिलेख में अनावश्यक काँट-छाँट व उपरिलेखन न हो इसके स्थान पर गलत प्रविष्टि को काट कर पुन: लेख किया जाना चाहिए तथा पुन: लेख पर सक्षम हस्ताक्षर किए जाने चाहिए । एक उच्च प्राथमिक स्तर के विद्यालय में विभिन्न
शीर्षकानुसार निम्नलिखित अभिलेखों का संधारण किया जाता है।

सामान्य व वित्तीय लेखा सम्बन्धी

वित्तीय कार्य के सन्दर्भ में रोकड़ बही (छात्र कोष व राजकीय), शुल्क प्राप्ती रजिस्टर, छात्रवृत्ति वितरण रजिस्टर, कर्मचारियों को प्रदत ऋण व अग्रिम वसूली लेखा रजिस्टर, डाक टिकट लेखा रजिस्टर, चेक/ड्राफ्ट मनीआर्डर इत्यादि की प्राप्ति व व्यवस्थापन रजिस्टर, आहरण वितरण अधिकारी को भेजे गए व प्राप्त पास शुदा बिलों का ब्यौरा रजिस्टर, विभागीय अंकेक्षण दलों द्वारा उठाये गये एतराजों का रजिस्टर संधारित किये जाते हैं । वर्तमान में सर्व शिक्षा अभियान व अन्य परियोजनाओं द्वारा विद्यालयों को राशि प्रदान की जाती है, ऐसी राशि को मदानुसार व्यय करते हुए सम्बन्धित कार्यालय द्वारा प्रदत्त निर्देशानुसार एवम् GF & AR नियमानुसार अभिलेख संधारण किए जाने चाहिए ।

,

स्थायी भण्डार पंजिका, अस्थाई लेखन सामग्री रजिस्टर, स्थाई तथा उपयोज्य सामान का
अवदान रजिस्टर, आदि ।

सामान्य अभिलेख

पत्र प्राप्ति रजिस्टर, पत्र प्रेषण पुस्तिका, पत्र वाहक पुस्तिका, अभिदर्शन पुस्तिका, निरीक्षण
पुस्तिका, आदेश रजिस्टर, स्कालर रजिस्टर, स्थानान्तरण प्रमाणपत्र पुस्तिका, विद्यालय इतिहास पत्रिका, रजिस्टरों की विषयवार सूची, प्रत्येक कक्षा एवं वर्ग हेतु पृथक छात्र उपस्थिति रजिस्टर, स्मरण पत्र जारी करने का रजिस्टर, ACR प्रेषण रजिस्टर ।

शैक्षिक अभिलेख

विद्यालय वार्षिक योजना, अध्यापक डायरी, प्रधानाध्यापक परिवीक्षण पुस्तिका, कक्षा कार्य ,गृहकार्य परिवीक्षण रजिस्टर ।

परीक्षा अभिलेख

परीक्षा परिणाम रजिस्टर, वीक्षण कार्य रजिस्टर, छात्र प्रगति रिकार्ड, परीक्षा सामग्री व्यवस्थापन रजिस्टर।

पुस्तकालय अभिलेख

पुस्तक प्राप्ति रजिस्टर, इश्यू (अवदान) रजिस्टर, विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं का रजिस्टर, पुस्तकालय वाचनालय उपयोग हस्ताक्षर रजिस्टर, पाठकों द्वारा प्रस्तुत मांग का ब्यौरा पस्तिका।

अन्य अभिलेख

ग्राम शिक्षा बोर्ड शिक्षा रजिस्टर, ग्राम शिक्षा योजना, शिक्षा से अब भी वंचित सूची, खेलकूद, प्रतियोगिता, त्यौहार, प्रार्थना सभा आयोजन रजिस्टर, सामग्री
रजिस्टर, शिक्षण अधिगम निर्माण रजिस्टर ।

उपरोक्त के अतिरिक्त वर्तमान व्यवस्था में सम्बंधित पीईईओ नवीनतम राजकीय निर्देश/आदेश के अनुसार अन्य प्रकार के अभिलेखों के संधारण हेतु आदेशित कर सकता है।

एक संस्था प्रधान को अभिलेखों की सुरक्षा के प्रति पूर्ण जागरूक रहना चाहिए। अभिलेख परिरक्षण अवधि के उपरांत भी स्वयम के स्तर पर अभिलेख नष्ट नही करना चाहिए बल्कि इस क्रम में सक्षम अनुमति अवश्य प्राप्त करनी चाहिए।

छात्रवृत्ति सम्बन्धी / प्रोत्साहन योजना फॉर्म प्रपत्र

  1. समस्त प्रकार की पूर्व मैट्रिक छात्रवृतियों के लिए सत्र 2018 -19 हेतु आवेदन पत्र एवं विस्तृत दिशा-निर्देश
  2. प्री-कारगिल,पोस्ट कारगिल एवं भूतपूर्व सैनिकों के पुत्र/पुत्रियों के लिए सत्र 2018 -19 हेतु छात्रवृतियों के आवेदन एवं विस्तृत दिशा-निर्देश
  3. गार्गी पुरस्कार हेतु आवेदन पत्र
  4. आपकी बेटी योजना फॉर्म 
  5. शारीरिक अक्षमतायुक्त (दिव्यांग) छात्राओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्कार 
  6. पालनहार योजना हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप
  7. स्कूटी योजना फॉर्म 18-19
  8. लैपटॉप प्राप्ति रसीद
  9. हितकारी निधि से राज्य कर्मचारियों के बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा में अध्ययनरत होने पर वित्तीय सहायता हेतु प्रार्थना पत्र
  10. राष्‍ट्रीय शिक्षक कल्‍याण प्रतिष्‍ठान भारत सरकार द्वारा राज्‍य के राजकीय/अराजकीय विद्यालयों में कार्यरत अध्‍यापकों के बच्‍चों को व्‍यवसायिक शिक्षा में अध्‍ययनरत होने पर वित्‍तीय सहायता हेतु प्रार्थना-पत्र आमंत्रण

“आयकर सम्बन्धी उपयोगी प्रपत्र एवं प्रावधान”

BY:-CP KURMI JI

आयकर गणना प्रपत्र : वित्तीय वर्ष 2018-19

  1. आयकर गणना प्रपत्र : वित्तीय वर्ष 2018-19 सामान्य एवं वरिष्ठ नागरिक हेतु (MS Excel)

  2. आयकर गणना प्रपत्र : वित्तीय वर्ष 2018-19 खाली पीडीऍफ़ फ़ॉर्मेट
  3. 7th Pay Fixation Arrear Excel Sheet (30%, 40%, 100% Salary Arrear)

IndividualAssessee :

व्यक्ति (निवासी अथवा अनिवासी (Non-Resident)) अथवा हिंदु अविभाजित परिवार (HUF) अथवा व्यक्तियों के संघ (AOP) अथवा व्यक्तियों की निकाय (Body of Individual) अथवा अन्य किसी कृत्रिम कानूनी व्यक्ति (Artificial Person) की स्थिति में निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए आयकर की दरें निम्न प्रकार हैं :

करयोग्य आय (Taxable Income) कर की दर
रू. 2,50,000 तक शून्य
रू. 2,50,000 – 5,00,000 5 %
रू. 5,00,000 – 10,00,000 20 %
रू. 10,00,000 से अधिक 30 %

निवासी वरिष्ठ नागरिक (Senior Citizen)

की स्थिति में (जो पिछले वर्ष के दौरान किसी भी समय साठ (60) वर्ष की आयु अथवा उससे अधिक का हो लेकिन पिछले वर्ष के अंतिम दिन पर अस्सी (80) वर्ष की आयु से कम का हो) निर्धारण वर्ष 2019-20 के लिए आयकर की दरें निम्न प्रकार हैं :

करयोग्य आय (Taxable Income) कर की दर
रू. 3,00,000 तक शून्य
रू. 3,00,001 – 5,00,000 5 %
रू. 5,00,000 – 10,00,000 20 %
रू. 10,00,000 से अधिक 30 %

Note :

  1. स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) मोटा-मोटी तौर पर एक निश्चित राशि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 40,000 है, जो टैक्स योग्य आय की गणना से पहले आपकी सैलरी से काट ली जाती है. यह साल 2005-06 तक आयकर अधिनियम का हिस्सा था, जब तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने इसे हटा दिया था.
  2. अधिभार (Surcharge): आयकर की राशि ऐसे कर के 10% की दर पर अधिभार द्वारा बढ़ार्इ जाएगी जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो। हालांकि, अधिभार (Surcharge) सीमांत राहत (marginal relief) के अनुसार ही देयहोगा। (अर्थात जहां कुल आय एक करोड़ रूपए से अधिक हो वहां आयकर तथा अधिभार के रूप में देययोग्य कुल राशि आय, जो एक करोड़ रूपए से अधिक हो, की राशि के अलावा एक करोड़ की कुल आय पर आयकर के रूप में देययोग्य कुल राशि से अधिक नही होगी)
  3. शिक्षा उपकर (Education Cess): आयकर तथा अधिभार की राशि ऐसे आयकर तथा अधिभार के 2% प्रतिशत की दर पर आंके गए शिक्षा उपकर द्वारा आगामी वृद्धि की जाएगी।
  4. माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर (Secondary and Higher Education Cess): आयकर तथा अधिभार की राशि ऐसे आयकर तथा अधिभार के 2 % की दर पर आंके गए माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा उपकर द्वारा आगामी वृद्धि की जाएगी।
  5. धारा 87A के अंतर्गत छूट : छूट निवासी व्यक्ति के लिए उपलब्ध होती हैं यदि उसकी कुल आय रू. 3,50,000 से अधिक न हो। छूट की राशि आयकर का 100 % अथवा 2,500 रू. जो भी कम हो, होगी
अग्रिम कर AY 2018-19 Advance Tax

अग्रिम कर (धारा 208, 209 और 211)

अग्रिम कर (Advance Tax) हर मामले में देय है जहां एक निर्धारिती (assessee) द्वारा देय कर (Tax) की राशि Rs.10,000/- या उससे अधिक है । निर्धारण वर्ष (A.Y.) 2018-19 के लिए अग्रिम कर के भुगतान सम्बंधित क़िस्त एवं देय तिथि निम्न प्रकार है :

कंपनी के अलावा (Advance Tax Liability for Assessee other than Companies i.e. Individual, HUF, P. Firm, AOP)

नियत तारीख (Due Date) देय किस्त (Installment)
15 सितम्बर 2018 अग्रिम कर का कम से कम 30%
15 दिसम्बर 2018 अग्रिम कर का कम से कम 60% (पूर्व में यदि कोई अग्रिम कर किस्त जमा की गयी हो तो उसे घटा दीजिये )
15 मार्च 2019 पूरा 100% अग्रिम कर (पूर्व में यदि कोई अग्रिम कर किस्त जमा की गयी हो तो उसे घटा दीजिये)

कंपनी के लिए (Advance Tax Liability for Assessee Companies)

नियत तारीख (Due Date) देय किस्त (Installment)
15 जून 2018 अग्रिम कर का कम से कम 15%
15 सितम्बर 2018 अग्रिम कर का कम से कम 45% (पूर्व में यदि कोई अग्रिम कर किस्त जमा की गयी हो तो उसे घटा दीजिये )
15 दिसम्बर 2018 अग्रिम कर का कम से कम 75% (पूर्व में यदि कोई अग्रिम कर किस्त जमा की गयी हो तो उसे घटा दीजिये )
15 मार्च 2019 पूरा 100% अग्रिम कर (पूर्व में यदि कोई अग्रिम कर किस्त जमा की गयी हो तो उसे घटा दीजिये)

ध्यान दें:

  1. ऎसे assessee जिनकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है और कोई व्यावसायिक आय नहीं है उन्हें अग्रिम कर जमा कराने से छूट है । इसके अलावा जिन assessee की आय section 44AD के तहत निर्धारित होती है उन पर भी अग्रिम कर लागु नहीं होता।
  2. 31 मार्च से पहले पर या अग्रिम कर के माध्यम से भुगतान किसी भी राशि भी उस दिन को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष के दौरान भुगतान अग्रिम कर के रूप में माना जाएगा|
  3. अग्रिम कर की देयता की गणना करते समय Chapter VIA (80C etc) के तहत कटौती स्वीकार्य हैं।
  4. TDS निर्धारिती की कुल कर देयता से कम किया जा सकता है और फिर विनिर्दिष्ट प्रतिशत अग्रिम कर की गणना की जा है।

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Deductions on Section 80C, 80CCC & 80CCD [Section 80CCE]
धारा 80 सी के तहत कर बचत / निवेश और भुगतान कटौती के लिए पात्र हैं।

धारा 80 सी के तहत कर बचत कटौती के रूप में पात्र निवेश

धारा 80 सी के तहत, 1,50,000 रुपये की कटौती अपनी कुल आय में से दावा किया जा सकता है। सरल शब्दों में, आप धारा 80 सी के माध्यम से अपने कुल कर योग्य आय में से 1,50,000 रुपये तक कम कर सकते हैं। यह कटौती एक व्यक्ति या एक हिन्दू अविभाजित परिवार के लिए अनुमति दी है। वित्त वर्ष 2016-17 के लिए सीमा भी 1,50,000 रुपये है। आपने अतिरिक्त करों का भुगतान किया है,तथा एलआईसी, पीपीएफ, मेडिक्लेम आदि में आपने निवेश किया है तो आप आयकर रिटर्न फाइल करके प्रतिदाय (रिफंड) प्राप्त कर सकते हैं।

ईएलएसएस फंड में निवेश

ये टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड है, इसमें अपनी संपत्ति का कम से कम 65% निवेश शेयर बाजार में करते हैं। ईएलएसएस फंड में 1.5 लाख रुपये का निवेश धारा 80 सी के तहत कर सकते हैं सिर्फ 3 साल के लिए। ईएलएसएस फंड का लाभ यह है कि वे सभी कर बचत निवेश में सबसे कम लॉक-इन के साथ आ रहा है। इसके अलावा, अपने इक्विटी निवेश की वजह से, ईएलएसएस फंड सबसे अच्छा मदद करने के लिए आप लंबी अवधि में मुद्रास्फीति से बढि़या मुनाफा कमा सकते है। हालांकि इन टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंडों गारंटीड रिटर्न की पेशकश नहीं करता है, मध्यम से लंबी अवधि में 12-15% रिटर्न उत्पन्न किया जा सकता है। इसके अलावा, क्योंकि ईएलएसएस फंड इक्विटी आधारित फंड हैं, एक से अधिक वर्ष के लिए आयोजित निवेश पर सभी लाभ कर मुक्त हैं।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश (पीपीएफ)

पीपीएफ खाते में किए गए जमाओं की धारा 80 सी के तहत कर कटौती के लिए पात्र हैं। 1.5 लाख रुपये की एक अधिकतम एक वित्तीय वर्ष में दावा किया जा सकता है। पीपीएफ गारंटी ब्याज कि हर वित्तीय वर्ष के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा तय की है देता है। FY 2016-17 के लिए पीपीएफ से मौजूदा ब्याज लगभग 8.% पर सेट है। पीपीएफ 15 साल, जिसके बाद निकासी कर मुक्त कर रहे हैं । पीपीएफ समय से पहले निकासी की अनुमति नहीं है, वहीं खाता धारक को अपने पीपीएफ खाते में जमा राशी पर ऋण ले सकते हैं। यह खाता डाकघरों और बैंक दोनों में खोला जा सकता है।

कर्मचारी भविष्य निधि में निवेश (ईपीएफ)

कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) खाते के लिए एक कर्मचारी 1.5 लाख रुपये की धारा 80 सी के तहत निवेश किया जा सकता है। यह वेतन का 12% के बराबर है तथा एक नियोक्ता द्वारा काट लिया जाता है और ईपीएफ या अन्य मान्यता प्राप्त भविष्य निधि में जमा किया जाता है । ईपीएफ पर मौजूदा ब्याज दर 8.8% है।

फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश (एफडी)

टैक्स सेविंग एफडी नियमित सावधि जमा हैं, इसमें अधिकतम 1.5 लाख रुपये के निवेश पर 5 साल की लॉक-इन अवधि और धारा 80 सी के तहत निवेश कर सकते हैं। विभिन्न बैंकों टैक्स सेविंग एफडी, जो 7-9% से लेकर अलग-अलग ब्याज की पेशकश करते हैं। रिटर्न की गारंटी कर रहे हैं और एफडी 100% पूंजी संरक्षण प्रदान करते हैं। लेकिन परिपक्वता पर, ब्याज निवेशक की कर योग्य आय में जोड़ा जाता है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में निवेश (एनपीएस) – कर्मचारी अंशदान 80CCD1

एनपीएस भारत सरकार द्वारा एक पेंशन योजना है जो सेवानिवृत्ति के बाद एक पेंशन राशि को असंगठित क्षेत्र और काम कर रहे पेशेवरों की अनुमति देता है। वेतन की 10% राशि लाख या अधिकतम 1.5 रुपये तक का निवेश लाभ उठाने के लिए धारा 80 सीसीडी (1) के तहत कर कटौती के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। एनपीएस अलग योजना है कि ग्राहक अपने जोखिम प्रोफाइल के अनुसार चुन सकते हैं प्रदान करता है। लेकिन इक्विटी के लिए उच्चतम जोखिम 50% पर छाया हुआ है। नामित पेंशन कोष प्रबंधकों को बदलने के लिए एक विकल्प यह भी अनुमति दी है। हालांकि, एनपीएस का एक बड़ा नुकसान यह है कि परिपक्वता राशि की आय करयोग्य आय हैं। इसके अलावा, वहाँ रिटर्न कोई गारंटी नहीं है जो एनपीएस से कमाया जा सकता है ।

राष्ट्रीय बचत प्रमाण पत्र की खरीद (एनएससी)

एनएससी जिस वित्तीय वर्ष में वे खरीद रहे हैं उसके लिए पात्र हैं। एनएससी में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश धारा 80 सी के तहत करों को बचाने के लिए बनाया जा सकता है। एनएससी नामित डाकघरों से खरीदा जा सकता है और 5 साल की लॉक-इन अवधि के साथ आते हैं। ब्याज सालाना चक्रवृद्धि लेकिन कर योग्य है।

यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान में निवेश (यूलिप)

यूलिप बीमा और निवेश का मिश्रण हैं। यूलिप में निवेश की गई राशि का एक हिस्सा बीमा प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है और राशि के बाकी शेयर बाजारों में निवेश किया है। यूलिप में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश धारा 80 सी के तहत कर टूट के लिए पात्र हैं। यूलिप गारंटीड रिटर्न की पेशकश नहीं है, क्योंकि वे एक इक्विटी बाजार से जुड़े उत्पाद हैं। यूलिप के नुकसान यह है कि वे जहां निवेश किया जाता है और कैसे निवेश की गई राशि का ज्यादा कमीशन और खर्च के लिए कटौती की जाती है पर स्पष्टता की पेशकश नहीं करते है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना में निवेश (एससीएसएस)
Investments in Senior Citizens Savings Scheme (SCSS)

एससीएसएस किसी के लिए भी एक योजना विशेष रूप से जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के या 55 से अधिक कोई है जो सेवानिवृत्ति के लिए चुना गया है। योजना 5 साल की परिपक्वता अवधि है और प्रति वर्ष 8.6% देता है। एससीएसएस में अधिकतम 1.5 लाख रुपये का निवेश धारा 80 सी के तहत करों को बचाने के लिए किया सकता है।

जीवन बीमा प्रीमियम

करदाता या करदाता की पत्नी और बच्चों के नाम पर जीवन बीमा के लिए अधिकतम 1.5 लाख रुपये का भुगतान वार्षिक प्रीमियम धारा 80 सी के तहत एक पात्र टैक्स सेविंग भुगतान है। अगर केवल प्रीमियम सम एश्योर्ड का 10% से कम है कटौती वैध है।

बच्चों की ट्यूशन फीस

ट्यूशन दो बच्चों की शिक्षा के लिए भुगतान शुल्क अधिकतम 1.5 लाख रुपये की धारा 80 सी के तहत कर कटौती के लिए पात्र है। शुल्क किसी भी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय या शैक्षणिक संस्थान भारत मंन स्थित करने के लिए भुगतान किया जा सकता है। फीस एक पूर्णकालिक पाठ्यक्रम के लिए ही होना है।

होम लोन की अदायगी

एक ऋण खरीद या एक आवासीय संपत्ति के निर्माण के लिए ले जाया के मूलधन अधिकतम 1.5 लाख रुपये के पुनर्भुगतान की धारा 80 सी के तहत कर कटौती के लिए पात्र है। इस कटौती भी स्टांप ड्यूटी, पंजीकरण शुल्क और हस्तांतरण खर्चों पर लागू है।

धारा 80 सी के तहत अन्य निवेश

पोस्ट ऑफिस में 5 साल की जमा योजना

एनएसएस की तरह अधिसूचित प्रतिभूतियों की सदस्यता

योग नेशनल हाउसिंग बैंक के होम लोन खाता योजना के लिए भुगतान किया

अधिसूचित एलआईसी वार्षिकी योजना के लिए अंशदान

कृषि और ग्रामीण विकास के लिए नेशनल बैंक की अधिसूचित बांड के लिए सदस्यता

लोकप्रिय 80 सी के निवेश की तुलना

निवेश जोखिम प्रोफाइल ब्याज गारंटी रिटर्न लॉक-इन अवधि

ईएलएसएस फंड इक्विटी सेसंबंधित 12-15% की उम्मीद नहीं 3 वर्ष

पीपीएफ जोखिम मुक्त 8.1% हाँ 15 साल

एनपीएस इक्विटी से संबंधित 8-10% की उम्मीद नहीं सेवानिवृत्ति तक

एनएससी जोखिम मुक्त 8.1% हाँ 5 साल

एफडी जोखिम मुक्त 7-9% हाँ 5 साल

यूलिप इक्विटी से संबंधित 8-10% की उम्मीद नहीं 5 साल

सुकन्या समृद्धि जोखिम मुक्त 8.6% हाँ 21 साल

एससीएसएस जोखिम मुक्त 8.6% हाँ 5 साल

80CCC (धारा 80 सीसीसी) : प्रीमियम के लिए कटौती एलआईसी या अन्य बीमा कंपनी की वार्षिकी योजना के लिए भुगतान

यह व्यक्तिगत भुगतान एलआईसी या किसी अन्य बीमा कंपनी के किसी भी वार्षिकी योजना में जमा किसी भी राशि अधिकतम 1.5 लाख रू. के लिए एक व्यक्ति को कटौती प्रदान करता है। योजना को धारा 10 (23AAB) में निर्दिष्ट से पेंशन प्राप्त करने के लिए किया जाना चाहिए। वार्षिकी अपनी परिपक्वता की तारीख से पहले आत्मसमर्पण कर दिया जाता है, तो समर्पण पर प्राप्त राशि उस वर्ष में करयोग्य है।

80CCD धारा 80 सीसीडी: पेंशन खाते में योगदान के लिए कटौती

कर्मचारी का योगदान – धारा 80 सीसीडी (1) एक व्यक्ति जो उसकी / उसके पेंशन खाते में जमा करता है की अनुमति देता है , अधिकतम कटौती वेतन या सकल कुल आय का 10% (करदाता एक कर्मचारी होने के मामले में) का 10% है 1,00,000 रुपये जो भी कम हो (किया जा रहा स्वरोजगार करदाता के मामले में)। 1,00,000 रुपये की सीमा 1,50,000 रुपये तक बढ़ा दी गई है। वित्तीय वर्ष 2015-16 (निर्धारण वर्ष 2016-17)से प्रारम्भ ।

एनपीएस के लिए स्वयं योगदान के लिए कटौती – धारा 80 सीसीडी (1 बी) एक नई धारा 80 सीसीडी (1 बी) अपने एनपीएस खाते में एक करदाता द्वारा जमा राशि के लिए अतिरिक्त कटौती के लिए शुरू किया गया है। अटल पेंशन योजना के लिए योगदान भी पात्र हैं। कटौती 50,000 रुपये तक के योगदान पर अनुमति दी है। इस राशि पर सरकार कोई अंशदान जमा नहीं कराती है। यह राशि धारा 80 सी के तहत जमा अधिकतम सीमा 1,50,000 रुपये से बाहर है।

नियोक्ता का योगदान – धारा 80 सीसीडी (2) कटौती कर्मचारी के पेंशन खाते को नियोक्ता के योगदान कर्मचारी के वेतन का 10% करने के लिए अनुमति दी है। इस कटौती पर कोई मौद्रिक सीमा नहीं है। यह राशि धारा 80 सी के तहत जमा अधिकतम सीमा 1,50,000 रुपये से बाहर है।

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Deductions on Section 80D to 80U & 87A
आयकर धारा 80D से 80U व धारा 87A के लिए कटौती वित्तीय वर्ष 2016-17

मेडिकल इंश्योरेंस पर कटौती धारा 80 D : चिकित्सा बीमा के लिए भुगतान के लिए प्रीमियम कटौती

वित्तीय वर्ष के लिए 2015-16 से कटौती 15,000 रुपये से बढाकर 25,000 रुपये की गयी है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए कटौती 20,000 रुपये से 30,000 रुपये की गयी है। अपूर्वदृष्ट सुपर वरिष्ठ नागरिकों (80 से अधिक वर्ष) चिकित्सा व्यय 30,000 रुपये तक खर्च के लिए धारा 80 डी के तहत कटौती के रूप में अनुमति दी जाएगी। हालांकि, माता पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम और चिकित्सा खर्च के लिए कुल कटौती 30,000 रुपये तक सीमित की गयी है । वित्तीय वर्ष के लिए 2017-18 के लिए भी ये ही प्रावधान लागु है ।

एक विकलांग रिश्तेदार के लिए चिकित्सा व्यय पर कटौती धारा 80 DD: विकलांग आश्रित रिश्तेदार के पुनर्वास के लिए कटौती

कटौती निम्न पर उपलब्ध है:

व्यय चिकित्सा उपचार, (नर्सिंग सहित), प्रशिक्षण और विकलांग आश्रित रिश्तेदार के पुनर्वास (Rehabilitation) पर खर्च हो

भुगतान या आश्रित विकलांग रिश्तेदार के रखरखाव के लिए निर्दिष्ट योजना के लिए जमा किया गया हो ।

वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए 75,000 रुपये की अचल कटौती – कहाँ विकलांगता 40 या अधिक %, लेकिन 80% से कम है। जहां गंभीर विकलांगता है (विकलांगता 80% या उससे अधिक है)। विकलांगता का प्रमाण पत्र निर्धारित चिकित्सा अधिकारी से अपेक्षित है इस स्थिति में 1,25,000 रुपये की नियत कटौती की जाएगी।

नोट: ‘गंभीर विकलांगता के साथ एक व्यक्ति को एक या एक से अधिक विकलांग के 80% या उससे अधिक के साथ एक व्यक्ति का मतलब धारा 56 में उल्लिखित (4) अधिनियम’ विकलांग (समान अवसर, अधिकारों का संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) के साथ व्यक्तियों ‘का।

विकलांगता प्रमाण पत्र किसी एक निर्दिष्ट विशेषज्ञ से लिया जा सकता है। मरीजों को एक निजी अस्पताल में इलाज किया जा रहा तो सरकारी अस्पताल से प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं हैं।

एक सरकारी अस्पताल में उपचार प्राप्त रोगियों को भी अस्पताल में पूर्णकालिक काम कर विशेषज्ञ से प्रमाण पत्र लेने की जरूरत है। इस तरह के विशेषज्ञ जनरल या आंतरिक चिकित्सा या किसी समकक्ष डिग्री है, जो भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त है में एक स्नातकोत्तर डिग्री होनी चाहिए।

सर्टिफिकेट 10 I अब आवश्यक नही है। नाम और रोगी की उम्र, बीमारी या बीमारी, नाम, पता, रजिस्ट्रेशन नंबर और विशेषज्ञ डॉक्टर के पर्चे जारी करने की योग्यता के नाम – प्रमाण पत्र होना चाहिए । मरीज को एक सरकारी अस्पताल में उपचार प्राप्त कर रहा है, तो यह भी नाम और सरकारी अस्पताल के पता होना चाहिए ।

स्व या आश्रित रिश्तेदार पर चिकित्सा व्यय पर कटौती धारा 80DDB: स्व या आश्रित रिश्तेदार पर चिकित्सा व्यय के लिए कटौती

एक कटौती रु 40,000 / – या राशि वास्तव में भुगतान किया है, जो भी कम हो व्यय वास्तव में खुद पर निवासी करदाता या निर्दिष्ट रोग या बीमारी के इलाज के लिए निर्भर रिश्तेदार द्वारा किए गए के लिए उपलब्ध है।

रोगों के नियम 11DD में निर्दिष्ट किया गया है। फार्म 10 में एक प्रमाण पत्र किसी भी पंजीकृत चिकित्सक से करदाता द्वारा प्रस्तुत किया जा रहा है।

वरिष्ठ नागरिक के मामले में कटौती 60,000 रुपये तक का दावा किया जा सकता है या वास्तव में राशि का भुगतान किया, जो भी कम हो।

वित्तीय वर्ष 2015-16 से – बहुत ही वरिष्ठ नागरिकों के लिए 80,000 रुपये अधिकतम कटौती है कि दावा किया जा सकता है।

उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण पर कटौती धारा 80 E : उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण पर ब्याज के लिए कटौती

कटौती ऋण पर ब्याज उच्च शिक्षा का पीछा के लिए ले जाया लिए अनुमति दी है। इस ऋण करदाता, पति या पत्नी या बच्चों के लिए या एक छात्र जिनके लिए करदाता एक कानूनी अभिभावक है के लिए ले जाया गया है। कटौती 8 साल की एक अधिकतम के लिए या ब्याज का भुगतान किया जाता है, जो भी पहले हो तक उपलब्ध है। दावा किया जा सकता है राशि पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

पहली बार घर मालिकों के लिए कटौती धारा 80EE: पहली बार घर मालिकों के लिए होम लोन पर ब्याज कटौती

वित्तीय वर्ष 2013-14 और वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए

इस खंड में आवास ऋण के ब्याज भुगतान पर कटौती प्रदान की है। इस धारा के तहत कटौती के केवल पहले खरीदे गए घर के लिए व्यक्तियों के लिए उपलब्ध है, जहां घर के मूल्य रुपये 40lakhs या उससे कम और घर के लिए लिया ऋण 25lakhs या उससे कम रुपये है। और ऋण 31.03.2014 को 01.04.2013 के बीच मंजूर की गई है। कुल कटौती इस धारा के तहत 1,00,000 रुपये से अधिक नहीं कर सकता है , वित्तीय वर्ष 2013-14 और 2014-15 (आकलन वर्ष 2014-15 और 2015-16) के लिए अनुमति दी थी ।

वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए धारा 80EE: यह कटौती वित्तीय वर्ष 2015-16 (निर्धारण वर्ष 2016-17) के लिए उपलब्ध नहीं है।

यह खंड बजट 2016 में पुनर्जीवित किया गया था और लागू शुरुआती वित्तीय वर्ष 2016-17 है। कटौती इस धारा के तहत केवल एक व्यक्ति जो एक पहली बार घर के मालिक है के लिए उपलब्ध है। संपत्ति खरीदी का मूल्य लाखों कम से कम 50 रुपये होना चाहिए और होम लोन 35 लाख रुपए से कम होना चाहिए। और ऋण एक वित्तीय संस्थान से लिया जाना चाहिए और 01.04.2016 से 31.03.2017 के बीच मंजूर किया जाना चाहिए। इस धारा के तहत 50,000 रुपये की अतिरिक्त कटौती के होम लोन ब्याज पर दावा किया जा सकता है। यह 2,00,000 रुपये की कटौती के एक आत्म कब्जे में आवासीय संपत्ति के लिए आयकर अधिनियम की धारा 24 के तहत अनुमति के अतिरिक्त है । वर्ष जिसके लिए इस कटौती का दावा किया जा सकता है की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

सामाजिक हितों के प्रति दान के लिए कटौती धारा 80 जी: सामाजिक हितों के प्रति दान के लिए कटौती

विभिन्न दान धारा में निर्दिष्ट 80 जी या तो 100% या 50% दान प्रतिबंध के बिना कटौती के लिए पात्र हैं। जहाँ 80 जी में दान लागू नहीं वहां कटौती की अधिकतम सीना 10,000 रुपये है । राशि है जो एक व्यक्ति द्वारा दान किया गया है धारा के तहत 80G के रूप में दावा किया जाकर कटौती करने की अनुमति दी है।

100% कटौती के साथ दान किसी भी योग्यता सीमा के बिना:

  • राष्ट्रीय रक्षा कोष केन्द्र सरकार द्वारा गठित
  • प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष
  • सांप्रदायिक सद्भाव के लिए नेशनल फाउंडेशन
  • एक अनुमोदित विश्वविद्यालय / राष्ट्रीय श्रेष्ठता की शैक्षिक संस्था
  • जिला साक्षरता समिति कि जिले के कलेक्टर की अध्यक्षता में किसी भी जिले में गठित
  • फंड गरीबों को चिकित्सा राहत के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थापित की
  • राष्ट्रीय बीमारी सहायता कोष
  • राष्ट्रीय ब्लड ट्रांसफ्यूजन काउंसिल या किसी राज्य रक्ताधान परिषद के लिए
  • आत्मकेंद्रित, सेरेब्रल पाल्सी, मानसिक मंदता और बहु विकलांग व्यक्तियों के कल्याण के लिए राष्ट्रीय ट्रस्ट
  • राष्ट्रीय खेल फंड
  • राष्ट्रीय सांस्कृतिक फंड
  • प्रौद्योगिकी विकास और आवेदन के लिए कोष
  • राष्ट्रीय बाल कोष
  • मुख्यमंत्री राहत कोष या किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के संबंध में उपराज्यपाल राहत कोष
  • सेना के केंद्रीय कल्याण कोष या भारतीय नौसेना परोपकार कोष या वायु सेना केंद्रीय कल्याण कोष, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के चक्रवात राहत कोष, 1996
  • 1 अक्टूबर, 1993 और अक्टूबर 6,1993 के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री राहत कोष
  • मुख्यमंत्री के भूकंप राहत कोष, महाराष्ट्र
  • किसी भी फंड विशेष रूप से गुजरात में आए भूकंप के पीड़ितों को राहत प्रदान करने के लिए गुजरात राज्य सरकार द्वारा गठित

किसी भी विश्वास, संस्था या फंड जो करने के लिए धारा 80 जी (5C) राहत (26 जनवरी 2001 और 30 सितंबर, 2001 के दौरान किए गए योगदान) गुजरात में भूकंप के पीड़ितों को उपलब्ध कराने के लिए लागू होता है या

  • प्रधानमंत्री की आर्मेनिया भूकंप राहत कोष
  • अफ्रीका (सार्वजनिक योगदान – भारत) फंड
  • स्वच्छ भारत कोष (वित्तीय वर्ष 2014-15 से लागू हो)
  • स्वच्छ गंगा कोष (वित्तीय वर्ष 2014-15 से लागू हो)
  • नशीली दवाओं के सेवन के नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कोष (वित्तीय वर्ष 2015-16 से लागू हो)

50% कटौती के साथ दान किसी भी योग्यता सीमा के बिना ।

  • जवाहर लाल नेहरू मेमोरियल फंड
  • प्रधानमंत्री की सूखा राहत कोष
  • इंदिरा गांधी मेमोरियल ट्रस्ट
  • राजीव गांधी फाउंडेशन

निम्न में दान करने के लिए 100% की कटौती समायोजित सकल कुल आय का 10% के लिए पात्र हैं

  • सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी ने मंजूरी दे दी, संस्था या संघ परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य के लिए उपयोग करने के लिए
  • भारतीय ओलंपिक संघ को या किसी अन्य अधिसूचित संघ या संस्था भारत में खेल और खेल या भारत में खेल और खेल के प्रायोजन के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए भारत में स्थापित करने के लिए एक कंपनी द्वारा दान।

निम्न में दान करने के लिए 50% कटौती समायोजित सकल कुल आय का 10% के लिए पात्र हैं

  • किसी अन्य फंड या किसी संस्था है जो संतुष्ट शर्तों धारा 80 जी में उल्लेख किया है (5)
  • सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी किसी भी धर्मार्थ परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग किये जाने के लिए
  • किसी भी अधिकारी से निपटने और आवास के लिए या योजना, विकास या शहरों, कस्बों, गांवों या दोनों के सुधार के उद्देश्य के लिए जरूरत है संतोषजनक के उद्देश्य के लिए भारत में गठित
  • किसी भी निगम अल्पसंख्यक समुदाय के हित को बढ़ावा देने के लिए धारा 10 (26BB) में निर्दिष्ट
  • मरम्मत या किसी भी अधिसूचित मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, चर्च या अन्य जगह के नवीकरण के लिए।

मकान किराया पर कटौती धारा 80GG: मकान किराया के लिए कटौती भुगतान किया जहां एचआरए प्राप्त नहीं है

इस कटौती का भुगतान किया जब एचआरए प्राप्त नहीं है किराए के लिए उपलब्ध है। करदाता या उसके पति या पत्नी या नाबालिग बच्चे रोजगार की जगह पर आवासीय आवास ही नहीं चाहिए। करदाता किसी अन्य जगह में स्वयं के कब्जे वाले आवासीय संपत्ति नहीं होना चाहिए। करदाता किराए पर रह रहे हैं और किराया देने होना चाहिए।

कटौती निम्न में से न्यूनतम पर उपलब्ध है

  1. किराए पर कुल आय का 10% घटा भुगतान
  2. रुपये 5000 / – प्रति माह
  3. कुल आय का 25%

वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए – कटौती की गणना के लिए 2,000 रुपये प्रति महीने की जगह 5,000 रुपये प्रति माह किया गया है। इसलिए 60,000 रुपये प्रति वर्ष की अधिकतम कटौती के रूप में दावा किया जा सकता है।

कंपनियों द्वारा राजनीतिक दलों के अंशदान पर कटौती धारा 80GGB: राजनीतिक दलों को कंपनियों द्वारा दिए गए योगदान पर कटौती

कटौती राशि किसी भी राजनीतिक पार्टी या एक इलेक्टोरल ट्रस्ट को यह योगदान के लिए एक भारतीय कंपनी के लिए अनुमति दी है। कटौती नकदी के अलावा अन्य किसी भी माध्यम से किया योगदान के लिए अनुमति दी है। राजनीतिक दल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 ए के तहत पंजीकृत किसी भी राजनीतिक दल से मतलब है। अंशदान कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 293A के अनुसार परिभाषित किया गया है।

राजनीतिक दलों के लिए व्यक्तियों द्वारा अंशदान पर कटौती धारा 80GGC: राजनीतिक दलों को किसी भी व्यक्ति द्वारा दिए गए योगदान पर कटौती

कटौती के किसी भी राशि का किसी भी राजनीतिक पार्टी या एक इलेक्टोरल ट्रस्ट के लिए योगदान के लिए एक करदाता के लिए अनुमति दी है। कटौती नकदी के अलावा अन्य किसी भी माध्यम से किया योगदान के लिए अनुमति दी है। राजनीतिक दल लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29 ए के तहत पंजीकृत किसी भी राजनीतिक दल से मतलब है।

बचत खाते पर ब्याज पर कटौती धारा 80 TTA : बचत बैंक खाते पर ब्याज के लिए सकल कुल आय से कटौती

अधिकतम 10,000 रुपये की कटौती एक बचत बैंक खाते से ब्याज आय के खिलाफ दावा किया जा सकता है। बचत बैंक खाते से ब्याज पहले अन्य आय में शामिल किया जाना चाहिए और कटौती जो भी कम हो अर्जित कुल ब्याज या 10,000 रुपये का दावा किया जा सकता है। यह कटौती एक व्यक्ति या एचयूएफ की अनुमति दी है। और यह बचत में जमा राशियों पर ब्याज के लिए दावा किया जा सकता है, एक बैंक, सहकारी समिति या पोस्ट ऑफिस के साथ खाते। धारा 80TTA कटौती फिक्स्ड डिपॉजिट या आवर्ती जमा या कॉरपोरेट बॉन्ड से ब्याज आय में से ब्याज आय पर उपलब्ध नहीं है।

व्यक्ति के लिए कटौती शारीरिक विकलांगता से पीड़ित धारा 80 U : व्यक्ति के लिए कटौती शारीरिक विकलांगता से पीड़ित

कटौती 75,000 रुपये / – एक व्यक्ति जो एक शारीरिक विकलांगता (अंधापन सहित) या मानसिक मंदता से ग्रस्त है। गंभीर विकलांगता के मामले में, 1,25,000 रुपये की कटौती का दावा किया जा सकता है। एक सरकारी चिकित्सक से प्रमाणपत्र प्राप्त किया जाना चाहिए। । प्रासंगिक नियम 11D है। यह एक निश्चित कटौती है और बिल या खर्च के आधार पर नहीं है।

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम पर कटौती (आरजीईएसएस) धारा 80CCG: राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस)

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम (आरजीईएसएस) 2012 बजट के बाद शुरू किया गया था। निवेशक जिसका सकल कुल आय 12 लाख रुपए से कम है। इस योजना में निवेश कर सकते हैं। laid down शर्तों पर निवेश राशि का 50% इक्विटी शेयर या निर्धारित 25,000 रुपए में से जो भी कम हो।

एक पेटेंट की रॉयल्टी के माध्यम से आय पर कटौती धारा 80RRB: एक पेटेंट की रॉयल्टी के माध्यम से किसी भी आय के संबंध में कटौती

पेटेंट अधिनियम 1970 के तहत 01/04/2013 के बाद पंजीकृत एक पेटेंट के लिए रॉयल्टी के माध्यम से किसी भी आय के लिए कटौती 3 लाख रुपये या उससे कम तक उपलब्ध होगी। जो भी कम हो। एक व्यक्ति करदाता भारत का निवासी हो जिसने पेटेंट कराया है । करदाता को निर्धारित प्रपत्र विधिवत विहित प्राधिकारी द्वारा हस्ताक्षर किए गए एक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।

लॉन्ग टर्म इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश पर कटौती [हटाया गया] धारा 80 CCF : लॉन्ग टर्म इन्फ्रास्ट्रक्चर बॉन्ड में निवेश यह खंड वर्ष 2012-13 से अब मान्य नहीं है।

धारा 87 क के तहत कर छूट 2500
अधिनियम की धारा 87A एक निर्धारिती जिनकी कुल आय 3.5 लाख रुपये से अधिक नहीं है आयकर से छूट 100% राशि के बराबर की हद तक या 2,500 रुपए की राशि जो भी कम हो देय करने का हक प्रदान करता है। इस तरह के आय पर टैक्स लाभ वित्त वर्ष 2016-17 के संबंध में देय के लिए उपलब्ध है । वित्त वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक यह अधिकतम 2,000 था ।

धारा 288A : करयोग्य आय को दस के निकटतम गुणज में पूर्णांकित करना

आयकर कानून के प्रावधानों के अनुसार कुल आय को दस के निकटतम गुणज में पूर्णांकित किया जाएगा। निम्नलिखित बातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए

पहली बार किसी पैसे से मिलकर रुपया के किसी भी हिस्से को नजरअंदाज कर दिया जाना चाहिए। पैसे की अनदेखी करता है, तो ऐसी राशि दस के गुणकों में नहीं है, और उस राशि में पिछले आंकड़ा पांच या उससे अधिक है, के बाद राशि अगले उच्च दस के गुणक में है बदला जायेगा और अगर पिछले आंकड़ा पांच से कम है , राशि को पिछले दस के गुणक में बदला जायेगा। इसे करदाता की कुल आय होना समझा जाएगा ।

उदहारण – अगर X की कर योग्य आय 2,52,844.99, रुपये है। तो पहले पैसे को नजरअंदाज कर दिया जाएगा, यानि 0.99 पैसे प्रति ध्यान नहीं दिया जाएगा) और रुपये की शेष राशि को 2,52,844 रुपए में पूर्णांकित किया जाएगा। 2,52,840 (इकाई अंक पांच से कम है)। 2,52,845 रुपये या 2,52,846.01, तो यह रुपए में पूर्णांकित किया जाएगा। 2,52,850 (इकाई अंक पांच या उससे ऊपर है)।

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मकान किराया भत्तेt (एचआरए) पर कर-छूट का प्रावधान,
Income Tax Rebate on House Rent

बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग अपने सैलरी पैकेज के एक हिस्से के रूप में हर माह ही मकान किराया भत्ताn (एचआरए) हासिल करते हैं। यहां तक कि बड़े-बड़े पदों पर रहने वाले कंपनियों के डायरेक्टर्स भी एचआरए प्राप्त करते हैं, जिससे उन्हें इनकम टैक्स बचाने में मदद मिलती है। आयकर अधिनियम की धारा 10(13ए) और नियम 2ए में मकान किराया भत्तेन (एचआरए) पर कर-छूट का प्रावधान किया गया है।

व्याख्या-1

इसके तहत नियोक्ता द्वारा दिए गए एचआरए पर वह कोई भी आयकरदाता कर-छूट का लाभ हासिल कर सकता है, जो किराये के मकान में रह रहा है। हालांकि इसकी अपनी कुछ सीमाएं भी हैं। अगर कोई कर्मचारी अपने स्वयं के मकान में रह रहा हो तो उसे एचआरए में इनकम टैक्स का लाभ नहीं मिलेगा।

कर-छूट का लाभ प्राप्त करने के लिए रसीद कब जरूरी है।?
सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के अनुसार कर-छूट का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नियोक्ता को किराये की रसीद प्रस्तुत करना तभी अनिवार्य होता है, जब कर्मचारी को प्रति माह तीन हजार रुपए से अधिक का एचआरए मिल रहा हो।

यह एक बड़ी भ्रांति है कि कर्मचारियों को जितना मकान किराया भत्ताn (एचआरए) मिलता है, उतना पूरा का पूरा ही इनकम टैक्स में डिडक्ट हो जाता है। ऐसा नहीं है। इसके भी कुछ नियम हैं, जिन्हें समझना जरूरी है।
क्या हैं नियम ?

एचआरए पर छूट का लाभ लेने के कुछ नियम हैं। यह छूट उतनी ही राशि पर मिलेगी, जो निम्नो में से न्यूनतम होगी :

असल मकान किराया भत्ताे, कुल वेतन की 10 फीसदी राशि को वास्तविक किराये में से घटाने के बाद शेष राशि।

मुंबई, दिल्ली, चैन्नई और कोलकाता में रहने वाले व्यक्ति के वेतन की 50 फीसदी और अन्य शहरों में रहने वाले व्यक्ति के वेतन की 40 फीसदी राशि। (वेतन में बेसिक और डीए भी शामिल रहता है।)

इसे ऐसे समझें
भोपाल निवासी XYZ का मासिक वेतन 30 हजार रु. है। मासिक एचआरए 6 हजार, मकान का किराया 5 हजार रु.।
वास्तविक एचआरए : 6000 रुपए।
मकान किराये के रूप में संजय 5000 रु. चुका रहा है। कुल वेतन (30,000) की 10 फीसदी राशि यानी 3000 को वास्तविक किराये में से घटाने के बाद शेष राशि आएगी 2000 रुपए।

चूंकि संजय भोपाल में रह रहा है तो उसके कुल वेतन (30,000) का 40 फीसदी 12,000 रुपए होगा।

नियमानुसार इन तीनों में से जो न्यूनतम होगा, उतनी ही राशि की कर में छूट मिलेगी। न्यूनतम राशि 2000 रु. है, यानी XYZ को कर योग्य आय में से 24 हजार रुपए की ही वार्षिक छूट मिलेगी। उसे प्रति माह एचआरए के रूप में 6 हजार रुपए मिलते हैं, अर्थात प्रति माह 4 हजार रुपए या वार्षिक 48 हजार रु. कर योग्य आय में जुड़ जाएंगे।
पैन नंबर कब जरूरी ?

अगर कोई कर्मचारी साल में एक लाख रुपए या उससे अधिक राशि किराये के रूप में दे रहा है तो उसे अपने मकान मालिक के पैन नंबर की जानकारी भी अपने नियोक्ता को देनी होगी। मकान मालिक के पास पैन नंबर नहीं होने पर उसे मकान मालिक से एक डिक्लेरेशन लेकर उसे नियोक्ता को देना होगा। 10 (13 ए) इनकम टैक्स की इस धारा में एचआरए से संबंधित प्रावधान दिए गए हैं।

व्याख्या-2

मकान किराया भत्ते (HRA) के सम्बन्ध में अक्सर भ्रम की स्थिति रहती है कि इसकी छूट आयकर में मिलेगी या नहीं यदि हाँ तो कितनी? किराये की रसीद प्रस्तुत करनी होगी या नहीं? क्या इसके साथ मकान स्वामी के PAN no. को भी प्रस्तुत करना होगा? इन बिंदुओं का क्रमशः स्पष्टीकरण —

किसको मिलेगी HRA की कटौती? —-

यदि कोई व्यक्ति किराये के मकान मेँ रहता है तो उसे HRA की कटौती मिलेगी।

किस सीमा तक मिलेगी HRA की कटौती?

निम्न तीन बिंदुओं में से जो राशि सबसे कम होगी वह आयकर मुक्त (income tax free) होगी —-

1- HRA की वास्तविक प्राप्त राशि
2- भुगतान किराया – वेतन का 10%
3- वेतन का 40%
यहाँ वेतन से आशय — basic salary + D.A. से है।
उपर्युक्त सभी गणना वार्षिक आधार पर होगी।

किराये की रसीद व मकान स्वामी के PAN no. को उपलब्ध कराना कब आवश्यक? —-

1- यदि प्राप्त HRA की राशि 3000 ₹ से कम व् आपके द्वारा भुगतान की गयी किराए की राशि 8333₹ मासिक से कम है तो न किराये की रसीद और न मकान स्वामी के पैन नं को उपलब्ध करना आवश्यक होता है।( सभी अध्यापक बन्धु सामान्यतः इसी श्रेणी में आते है।)

2- यदि HRA की प्राप्त राशि 3000 ₹ या इससे ज्यादा और भुगतान किये किराये की राशि 8333₹ से कम है तो सिर्फ किराये की रसीद(revenue स्टाम्प सहित) प्रस्तुत करनी होगी पैन नं. नहीं ।

3- यदि प्राप्त HRA और भुगतान किराए की राशि दोनोँ ही क्रमशः 3000₹ व् 8333₹ से अधिक है तो किराये की रसीद व मकान स्वामी के PAN no. दोनोँ को ही उपलब्ध करना होगा।

नोट— किराया भुगतान की राशि में बिजली या मरम्मत व्यय को सम्मलित नहीं किया जाता है।

उदाहरण द्वारा स्पष्टीकरण——

माना mr. X ब्लाक के किसी स्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत है और ललितपुर शहर में 4000 ₹ मासिक किराए के मकान में रहते है। उनका अन्य विवरण निम्न है—

(वार्षिक आधार पर )
Basic salary 201720 ₹
D. A. 229162 ₹
HRA (920×12) 11040 ₹

Solution—-निम्न बिंदुओं में जो सबसे कम राशि होगी वह आयकर से मुक्त होगी–
1- HRA की वास्तविक प्राप्त राशि= 11040 ₹

2- किराए की रकम – वेतन का 10%
4000×12 – (201720+229162)×10%
48000 – 43088 = 4912 ₹

3- वेतन का 40%
430882×10% = 172353 ₹

उपर्युक्त तीनों में सबसे कम राशि 4912 ₹ है जो कि आयकर से मुक्त होगी। अतः प्राप्त HRA की 11040 ₹ की राशि में से 4912 टैक्स से फ्री होंगे व 11040 – 4912 = 6128₹ पर टैक्स लगेगा।
हाँ, यदि Mr. X को संपूर्ण HRA की राशि आयकर से बचानी है तो उन्हें और अधिक महँगे किराये के मकान में रहना होगा। अर्थात उपरोक्त द्वतीय बिंदु की गणना का अंतर 4912 ₹ की जगह 11040 ₹ न्यूनतम करना होगा।
उपरोक्त केस में Mr. X को न तो किराए की रसीद और न तो मकान स्वामी के PAN no. को उपलब्ध कराना आवश्यक है।

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HOME LOAN : ऐसे पाएं होम लोन में टैक्स पर छूट होम लोन लेते समय टैक्स छूट पाने के क्या हैं कायदे?

होम लोन एक बोझ जैसा महसूस हो सकता है, क्योंकि इस पर लगने वाला ब्याज का बोझ कर्ज लेने वाले की खासी कमाई खा जाता है ।

टैक्स का बोझ कम करने के लिए सरकार समयसमय पर टैक्स में छूट के जरिए राहत देती रहती है. टैक्स में छूट पाने के लिए घर खरीद कर न सिर्फ आप एक मकान मालिक बन सकते हैं, बल्कि टैक्स में छूट भी पा सकते हैं।

सरकार द्वारा होम लोन लेने वालों को टैक्स पर छूट देने का मूल उद्देश्य लोगों को अपनी संपत्ति खरीदने के लिए प्रोत्साहित करना है। टैक्स बचाने और लंबे समय तक इस में राहत पाने का सब से अच्छा तरीका है होम लोन।

इनकम टैक्स ऐक्ट 1961 कहता है कि लोन को टैक्स बचाने के इंस्ट्रूमैंट के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. कोई प्रौपर्टी खरीदने के लिए होम लोन लेने के बाद व्यक्ति अपने टैक्स में छूट के लिए आवेदन कर सकता है. यह छूट न सिर्फ मूल राशि पर, बल्कि होम लोन पर लगने वाले ब्याज पर भी लागू होती है।

होम लोन पर इनकम टैक्स में छूट इनकम टैक्स ऐक्ट के सैक्शन 24, 80 सी और 80 ईई के तहत मिलती है. यह लाभ सिर्फ किसी व्यक्ति विशेष और एचयूएफ।यानी हिंदू अनडिवाइडैड फैमिलीज को मिल सकती है. टैक्स में यह छूट।सिर्फ होम लोन पर ही मिलती है, अन्य तरह के लोन जैसे कि लोन अगेंस्ट प्रौपर्टी यानी एलएपी आदि पर नहीं ।

टैक्स में मिलने वाली छूट टैक्स पर छूट होम लोन के 2 हिस्सों पर उपलब्ध है–मूल राशि और ब्याज पर

मूल राशि पर लाभ जहां सैक्शन 80 सी के तहत पाया जा सकता है वहीं इसी लाभ के लिए सैक्शन 24 के तहत भी आवेदन किया जा सकता है. केंद्र सरकार ने सैक्शन 80 ईई को 2013-14 के बजट में पेश किया था, जिस के तहतब्याज के भुगतान पर कुछ शर्तों के साथ टैक्स में छूट मिलती है. जिन लोगों ने वित्त वर्ष 2013-14 में पहली बार होम लोन लिया था वे ब्याज की अदायगी पर सैक्शन 24 के तहत 1 लाख रुपए की अतिरिक्त छूट पाने के हकदार हो गए. अनयूटिलाइज्ड ब्याज के लिए वर्ष 2014-15 के लिए भी छूट उपलब्ध है. टैक्स पर अतिरिक्त छूट मिलने का मतलब यह है कि आप थोड़ा ज्यादा पैसा बचा सकते हैं. लेकिन सरकार ने इस छूट को आगे के वर्षों के लिए।नहीं बढ़ाया क्योंकि इस के बारे में सैक्शन 80 ईई में वर्णित नहीं किया गया है ।

वित्त वर्ष 2016-17 के लिए यह लाभ सिर्फ सैक्शन 80 सी और सैक्शन 24 के तहत ही उपलब्ध है ।

? मूल राशि की अदायगी पर छूट :

होम लोन लेने वाला व्यक्ति मूल राशि का जो हिस्सा हर महीने अदा कर सकता है उस के आधार पर इनकम टैक्स में छूट वह इनकम टैक्स ऐक्ट के सैक्शन 80 सी के तहत ले सकता है. इस सैक्शन के तहत कोई भी व्यक्ति अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की राशि पर टैक्स में छूट पा सकता है. डेढ़ लाख रुपए की छूट की यह सीमा आप के पीपीएफ, टैक्स सेविंग एफडी, इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड, नैशनल सेविंग सर्टिफिकेट और अन्य सभी को मिला कर मिलने वाली छूट होती है ।
इस सैक्शन के तहत छूट तब तक लागू नहीं होती है जब तक प्रौपर्टी निर्माणाधीन हो. यह लाभ प्रौपर्टी का कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही मिलता है. सब से महत्त्वपूर्ण बात यह जानना है कि एक टैक्सपेयर उन सालों के दौरान की गई ब्याज अदायगी का संयोजन कर के 5 बराबर किस्तों में छूट की मांग कर सकता है और इस की शुरुआत निर्माण कार्य पूरा होने वाले वर्ष से की जा सकती है. लेकिन अगर प्रौपर्टी का मालिक पजेशन लेने के 5 साल के भीतर प्रौपर्टी बेच देता है तो छूट नहीं मिलती ।

अगर प्रौपर्टी का मालिक इस पीरियड में टैक्स पर छूट लेता है तो इस छूट को आमदनी का हिस्सा माना जाएगा और टैक्स देना होगा । यह छूट पेमैंट के आधार पर भी उपलब्ध होती है, न कि उन सालों पर जब यह भुगतान किया गया ।

? संयुक्त रूप से छूट

सैक्शन 80 सी प्रौपर्टी की खरीदारी के समय लगी स्टैंप ड्यूटी और रजिस्टे्रशन चार्ज पर भी टैक्स में छूट देता है. सैक्शन 80 सी के तहत कोई भी व्यक्ति अधिकतम डेढ़ लाख रुपए तक की छूट पा सकता है जोकि पीपीएफ, टैक्स सेविंग एफडी, इक्विटी ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड, नैशनल सेविंग सर्टिफिकेट व अन्य सभी को मिला कर संयुक्त रूप से मिलती है. यह छूट उस साल के दौरान ली जा सकती है जिस में इस की अदायगी की गई हो ।

? ब्याज की अदायगी पर छूट

प्रौपर्टी खरीदने पर यह लाभ सिर्फ उसी स्थिति में लिया जा सकता है जब प्रौपर्टी का निर्माण पूरा हो चुका हो और इस का पजेशन सर्टिफिकेट मिल चुका हो. प्रौपर्टी की खरीद के अलावा, टैक्स पर छूट रिहायशी प्रौपर्टी के निर्माण, मरम्मत, नवीनीकरण और पुनर्निर्माण आदि के वास्ते लिए गए लोन पर मिल सकती है।

हाउस प्रौपर्टी से होने वाली आमदनी को होम लोन पर लगने वाले ब्याज के साथ ऐडजस्ट किया जा सकता है.
अपने कब्जे वाली प्रौपर्टी पर छूट पाने की अधिकतम राशि 2 लाख रुपए होती है. इस के अलावा, अगर प्रौपर्टी लोन मंजूर होने की तारीख से ले कर 3 वर्षों के भीतर कंप्लीट नहीं होता है तो ब्याज पर मिलने वाली छूट की सीमा 2 लाख रुपए से घट कर 30 हजार रुपए हो जाती है. अगर संपत्ति पर अपना कब्जा नहीं है तो टैक्स में छूट की कोई सीमा नहीं होती है, ब्याजकी कुल राशि पर टैक्स में छूट के लिए आवेदन किया जा सकता है।

?इस का एक अन्य पहलू भी है- अगर प्रौपर्टी का मालिक अपने घर में न रह कर नौकरी या व्यापार अथवा अन्य किसी जिम्मेदारी की वजह से किसी अन्य जगह पर रहता है तो वह 2 लाख रुपए तक की छूट हासिल कर सकता है। सैक्शन 80 सी के तहत पेमैंट की अदायगी के आधार पर मिलने वाली छूट के विपरीत इस।सैक्शन के तहत मिलने वाली छूट संग्रहण आधारित होती है ।

ऐसे में छूट वार्षिक आधार पर ली जा सकती है. ऐसा उस स्थिति में भी लागू होता है जब उस वर्ष के दौरान कोई अदायगी न की गई हो।

होम लोन : कायदा और फायदा
होम लोन रिटेल बैंकिंग का सब से ज्यादा बिकने वाला उत्पाद है. जौइंट होम लोन लेने से लोन राशि बढ़ती है, वहीं दूसरी तरफ टैक्स बचत में भी फायदा मिलता है।
सिंगल होम लोन में केवल होम लोन लेने वाले को ही टैक्स का फायदा मिलता है ।

इंट होम लोन में लोन में भागीदारी करने वाले का भी टैक्स बचता है बैंक लोन देते वक्त दोनों आवेदकों की इनकम को ध्यान में रख कर लोन देता है ।

इनकम टैक्स ऐक्ट 24 (बी) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपए तक की छूट का क्लेम कर सकते हैं । इनकम टैक्स ऐक्ट 80 सी के तहत प्रिंसिपल अमाउंट पर 1.5 लाख रुपए तक काक्लेम किया जा सकता है। किसी संस्था या संगठन के नाम होम लोन नहीं दिया जाता है ।

पेंशन नियम एवं ग्रेच्युटी

पेंशन नियम एवं ग्रेच्युटी
वर्तमान में राज्य कर्मचारियों के लिये दो प्रकार के पेंशन नियम लागू है :
(1) 1-1-2004 से पूर्व नियुक्त कर्मचारी (31-12-2003 तक)
“राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996”
(2) 1-1-2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारी
“नई पेंशन अंशदान योजना 2004”
(1) पेंशन नियम-1996
कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की दिनांक के दूसरे दिन ही पेंशन परिलाभ का भुगतान करने का प्रावधान है ।
कार्यालय अध्यक्ष कर्मचारी को सेवानिवृत्ति तिथि से छ: माह पूर्व समस्त प्रकरण (सेवा पुस्तिका एवं पेंशन कुलक वांछित प्रमाणपत्रों सहित) पेंशन विभाग को अधिकृतियां जारी करने हेतु अनिवार्य रूप से प्रेषित कर दिया जावे । कर्मचारी स्वयं अपने प्रकरण के प्रति जागरुक रहे जैसे जन्म तिथि एवं पूरे सेवाकाल का सत्यापन,मनोनयन पत्र, लिये गये ऋणों का अदेय प्रमाणपत्र इत्यादि।
पेंशन का वर्गीकरण
(१) अधिवार्षिकी पेंशन – अनिवार्य सेवा निवृत्ति की आयु प्राप्त करने पर पेंशन (वर्तमान में 60 वर्ष )
(२) निवृत्ति पेंशन – (अ) नियम 50 (1) के अन्तर्गत स्वेच्छिक सेवा निवृत्ति जो 15 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने के बाद किसी भी समय वह नियुक्ति अधिकारी को न्यूनतम तीन माह का नोटिस देकर ले सकता है ।
स्वेच्छिक सेवा निवृत्ति पर अर्हकारी सेवा 5 वर्ष की अवधि तक इस शर्त के अध्यधीन रहते हुए बढ़ाई जायेगी कि उसकी कुल अर्हकारी सेवा किसी भी दशा में 33 वर्ष से अधिक नहीं होगी तथा वह उसकी अधिवार्षिकी आयु के बाद समाप्त नहीं होगी । पेंशन योग्य सेवा में 5 वर्ष का लाभ बढ़ाने से इस अवधि की कोई वेतन वृद्धि
देय नहीं होगी ।
(ब) नियम 53 (1) के अनुसार सरकारी कर्मचारी द्वारा 15 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने या 50 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) पूर्ण करने पर अनिवार्य सेवा निवृत्त किया जाता है तो उसे निवृत्त पेंशन प्राप्त होगी । इसमें 5 वर्ष की प्रकल्पित अर्हकारी सेवा नहीं जोड़ी जायेगी ।
(3) असमर्थता पेंशन –
शारीरिक या मानसिक दुर्बलता के कारण कार्य करने असमर्थ होने पर चिकित्सा अधिकारी के प्रमाणपत्र पर देय।
(4) क्षतिपूरक पेंशन –
स्थाई पद समाप्त होने के कारण सेवामुक्ति के चयन किये जाने पर देय ।
(5) अनिवार्य सेवानिवृत्ति पेंशन
नियम 42 के अन्तर्गत दण्ड स्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति किये जाने पर यह पेंशन देय ।
पेंशन फार्मूला
पेंशन योग्य सेवा गणना कुल 33 वर्ष ही मानी गई है और अधिकतम पेंशन वेतन परिलब्धियों का 50 प्रतिशत देय है कम सेवा होने पर अनुपातिक पेंशन देय है ।
पेंशन राशि= अंतिम वेतन परिलब्धियाँ/2 x
छ: माही अवधि/66
नोट :- छः माही अवधि अधिकतम 66 मान्य है । पूरे तीन माह से छ: माह की अवधि एक छ: माही मानी जाती है ।
तीन माह से कम सेवा अवधि जैसे 29 वर्ष 2 माह 15 दिन के लिये 58 छः माही मानी जायेगी
पेंशन का रूपान्तरण
1. सेवा निवृत्त कर्मचारी अपनी मूल पेंशन की अधिकतम एक तिहाई या ऐसी निचली सीमा को रूपान्तरित करा सकता है ।
2. सेवा निवृत्ति की तिथि के एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रपत्र एक में बिना चिकित्सा प्रमाणपत्र के आवेदन किया जा सकता है ।
3. रूपान्तरण राशि की गणना आगामी जन्म तिथि पर पूर्ण होने वाले वर्षों के अनुसार रूपान्तर फेक्टर के आधार पर देय होगी ।
4. रूपान्तरण राशि का सूत्र
= 1/3 पेंशन x 12 x रूपान्तरण फेक्टर
यदि एक कर्मचारी 60 वर्ष की आयु पर सेवा निवृत्त होता है तो रूपांतरण फेक्टर 9.81 होगा क्योंकि उसकी आगामी जन्मतिथि पर आयु 61 वर्ष की होगी।
5. रूपान्तरण राशि का पुनः स्थार्पन (रेस्टोरेशन) रूपान्तरण भुगतान की तिथि से 14 वर्ष पूरे होने के बाद अगले माह से पुनः पूर्ण पेंशन दे दी जायेगी ।
परिवार पेंशन
पारिवारिक पेंशन 1913/- प्रतिमाह के न्यूनतम और 1-7-2004 से सरकार के उच्चतम वेतन रूपये 33,600/- के 30% के अधिकतम रहते हुए परिलब्धियों का 30 % अनुझेय होगा ।
ग्रेच्यूटी
ग्रेच्युटी सेवानिवृत्ति पर दी जाने वाली ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि 10 लाख है ।
ग्रेच्युटी सूत्र= अंतिम वेतन परिलब्धियाँ/4 x छ: माही अवधि
(2) नई पेंशन अंशदान योजना 2004
1. राज्य सरकार द्वारा 1-1-2004 तथा इसके पश्चात् नियुक्त समस्त राज्य कर्मचारियों पर यह योजना लागू होगी।
2. इस योजना में कर्मचारी को प्रतिमाह मूल वेतन, मंहगाई वेतन एवं मंहगाई भत्ते का 10 % पेंशन अंशदान के रूप में जमा कराना होगा । राज्य सरकार द्वारा समकक्ष अंशदान की राशि सम्बन्धित संवेतन के बजट में भारित कर
जमा करवाई जायेगी ।
3. यह राशि ब्याज सहित निजी निक्षेप खाते में जिला कोषालय में जमा कराई जायेगी ।
4. अंशदायी पेंशन के निजी निक्षेप खाते में जमा राशि पर 8% की दर से वार्षिक ब्याज देय होगा ।
5. 1-1-2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारियों के अलग से वेतन विपत्र बनाया जायेगा ।
6. निजी निक्षेप खातों का संचालन निदेशक, राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग द्वारा किया जायेगा ।
(विस्तृत विवरण शिविरा पत्रिका के अगस्त, सितम्बर 2004 के अंक में है ।)

अवकाश नियम

नियम-93 1-अर्द्ध-वेतन एवं रूपांतरित अवकाश की देयता-

1-1-राज्य कर्मचारी को प्रत्येक पूर्ण वर्ष की सेवा पर 20 दिन का अर्द्ध-वेतन अवकाश प्राप्त होगा।

1-2-कर्मचारी को देय अर्द्ध-वेतन अवकाश चिकित्सा-प्रमाण-पत्र या निजी कारणों से स्वीकृत किए जा सकते हैं।

2-एक स्थाई कर्मचारी उसको देय अर्द्ध-वेतन अवकाशों की आधी संख्या तक रुपांतरित(commuted) अवकाश अपनी स्वयं की बीमारी के आधार पर स्वीकृत करा सकता है (अर्द्ध-वेतन अवकाशों का आधी संख्या में पूर्ण वेतन पर रूपान्तरण)। इसके लिए कर्मचारी को एक प्राधिकृत चिकित्सक से रोग-प्रमाण-पत्र(sickness certificate) प्राप्त कर प्रस्तुत करना होगा।

रुपांतरित अवकाश स्वीकृति की शर्तें-

1- कर्मचारी को रुपांतरित अवकाश स्वीकृत करने पर उसके अवकाश लेखों से दुगुनी संख्या में अर्द्ध-वेतन अवकाश घटा(debit) दिए जाएंगे।

2-1 अवकाश स्वीकृतिकर्ता अधिकारी को इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि अवकाश समाप्ति पर उस कर्मचारी के सेवा पर उन्हें उपस्थित होने की पूर्ण संभावना है।

2-2 देय अर्द्ध-वेतन अवकाशों में से 180 दिन तक के अर्द्ध-वेतन अवकाशों को एक समय में चिकित्सक के प्रमाण पत्र के बिना, सार्वजनिक हित में अनुमोदित पाठ्यक्रम के लिए, रुपांतरित अवकाशों के रूप में स्वीकृत किया जा सकता है।

3-किसी स्थाई कर्मचारी को अदेय अवकाश(Leave not due) स्वीकृत किए जाने की शर्तें इस प्रकार है-

3-1- अवकाश स्वीकृत करने वाला प्राधिकारी संतुष्ट हो कि वह कर्मचारी अदेय अवकाशों की समाप्ति के बाद सेवा पर पुनः उपस्थित हो जाएगा,

3-2- अदेय अवकाशों की संख्या उस अनुमानित संख्या तक ही होनी चाहिए जो कर्मचारी द्वारा अवकाश से लौटकर अर्द्ध-वेतन अवकाश के रूप में अर्जित की जा सके,

3-3- कर्मचारी के संपूर्ण सेवा काल में अधिकतम 360 दिन का अदेय अवकाश दिया जा सकेगा। एक बार में 90 दिन तक तथा चिकित्सा-प्रमाण-पत्र के आधार के अतिरिक्त अन्य आधार पर 180 दिन तक का ही अदेयअवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।

3-4-अदेय अवकाश करमचारी के अर्द्ध-वेतन अवकाश के खाते में डेबिट किए जाएंग तथा उन्हें कर्मचारी द्वारा भविष्य में अर्जित किए जाने वाले अर्द्ध-वेतन अवकाश से समायोजित किया जाएगा।

4- एक कर्मचारी जिसे संबंधित सेवा नियमों के अंतर्गत अथवा सेवा नियम नहीं होने पर सक्षम राजकीय आदेश के अंतर्गत अस्थाई रूप से नियुक्त किया गया है तथा जो उस पद की शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव की पात्रता पूर्ण करता है, उसे 3 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के पश्चात रुपांतरित अवकाश तथा अदेय अवकाश स्वीकृत किए जा सकेंग।

5-यदि किसी कर्मचारी को रुपांतरित अवकाश अथवा अदेय अवकाश स्वीकृत किया गया हो और उसकी सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाए अथवा उसे राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 35 के अंतर्गत असमर्थता के आधार पर सेवानिवृत कर दिया जाए तो अवकाश वेतन संबंधी कोई वसूली नहीं की जाएगी। अन्य मामलों जैसे त्यागपत्र, स्वैच्छिक सेवानिवृति, सेवा से निष्कासन या बर्खास्तगी आदि में अवकाश वेतन की नियमानुसार वसूली की जाएगी।

नियम 94 – सेवा समाप्ति अवकाश –

ऐसे अवकाश सामान्य तौर पर अस्थाई कर्मचारियों को ही स्वीकृत किये जाते है। सक्षम अधिकारी ऐसे अवकाशों को अपने विवेक के आधार पर स्वीकृत कर सकता है। इस नियम के तहत शिक्षार्थी को यह लाभ देय नही होता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 95 – अवकाश अवधि सेवा व्यवधान नही है –

सामान्य तौर पर यदि कोई अस्थायी कर्मचारी अपने पद के समान संवर्ग में ही स्थायी रूप से नियुक्त है तो उसकी पिछली सेवा अवकाश अवधि के तहत माना जायेगा।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 96 – असाधारण अवकाश –

साधारण तौर पर कर्मचारी असाधारण अवकाश तभी स्वीकृत कराता है, जब उसके अवकाश खाते में किसी भी तरह के अवकाश शेष न हो। दिनांक 26.02.2002 के बाद अस्थायी कर्मचारी को असाधारण अवकाश तभी मिलता है, जब उसने 03 वर्ष की सेवा की है। अस्थायी कर्मचारियों को अधिकतम 18 माह का असाधारण अवकाश देय है। दिनांक 01.01.2007 के बाद परिवीक्षाधीन अवधि में अधिकतम 03 माह का असाधारण अवकाश देय है। विपरीत परिस्थितियों में असाधारण अवकाश परिवीक्षाधीन कर्मचारियों को 03 माह से अधिक भी स्वीकृत है। 03 माह से अधिक यदि कोई कर्मचारी असाधारण अवकाश ले तो अधिक ली गई अवधि उसके परिवीक्षाधीन काल को प्रभावित करती है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 99 – विशेष असमर्थता अवकाश -(दिनांक 14.12.12 के बाद) घर से कार्यालय व कार्यालय से घर ड्यूटी नही माना गया है। दिनांक 18.05.2010 के बाद चुनाव में ड्यूटी घर से निकलते ही मानी जाती है। इस नियम के तहत सरकारी कर्मचारी को कार्यस्थल पर यदि कोई क्षति हो जाती है तो क्षति होने के तीन माह तक आवेदन पत्र देकर विशेष असमर्थता अवकाश का लाभ उठा सकता है। सामान्य तौर पर विशेष असमर्थता अवकाश अधिकतम 24 माह तक देय होता है। यदि 24 माह उपरांत भी कर्मचारी की स्थिति में कोई सूधार न हो तो चिकित्सा रिपोर्टो के आधार पर अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है। *विशेष असमर्थता अवकाश के दौरान वेतन* – उच्च सेवा में 120 दिन अवकाश- पूर्ण वेतन उच्च सेवा में 120 दिन से अधिक अवकाश- अर्द्ध वेतन चतुर्थ श्रेणी सेवा मंे 60 दिन अवकाश- पूर्ण वेतन चतुर्थ श्रेणी सेवा में 60 दिन से अधिक अवकाश- अर्द्ध वेतन

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 100 – असमर्थता अवकाश

इसके के दौरान सरकार द्वारा कोई क्षतिपूर्ति भत्ता स्वीकृत होने पर वेतन में कटौती – इस नियम के तहत यदि असमर्थता अवकाश के दौरान क्षतिपूर्ति भत्ता मिले तो भत्ते के बराबर की राशि कर्मचारी के वेतन में से काट ली जाती है। कर्मचारी के व्यक्तिगत बीमा दावों पर इस नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 103 – प्रसुति अवकाश -*

(दिनांक 06.12.2004 से प्रभावी) महिला कर्मचारियों को सम्पूर्ण सेवाकाल में 02 बार अधिकतम 180 दिन का प्रसुति अवकाश मिलता है। 02 बार के बाद भी कोई संतान जीवित न हो तो एक बार और मिल सकता है। दिनांक 11.10.2008 के बाद प्रसुति अवकाश अवधि 135 दिन से बढ़कर 180 दिन की गई है। दिनांक 06.12.2004 के बाद ये अवकाश अस्थायी महिला कर्मचारी को भी देय है। किसी भी कर्मचारी को पूर्ण वेतन व भत्ते देय है। सामान्य तौर पर गर्भपात पर यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर विपरीत परिस्थितियों में 06 सप्ताह तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। (दिनांक 14.07.2006 के बाद से)

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 103(अ) – पितृत्व अवकाश –

(दिनांक 06.12.2004 से) किसी पुरूष के प्रथम दो संतानों पर उसे बच्चे के जन्म के 15 दिन पूर्व व 03 माह के भीतर 15 दिन का अवकाश मिलता है।

*नियम 103(ब) – दत्तक अवकाश – * (दिनांक 07.12.2011 से) किसी महिला कर्मचारी को 180 दिन का अवकाश सेवाकाल में दो बार ही।01 साल से कम आयु के बच्चे को गोद लेने पर मिलता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 104 – प्रस्तावित अवकाश की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का संयोजन – * प्रसूति/पितृत्व अवकाश किसी भी प्रकार के अवकाश से संयोजित कर स्वीकृत किए जा सकते है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 105 – पृथक श्रेणी का अवकाश/चिकित्सालय अवकाश की सीमा –

सामान्य तौर पर यह अवकाश उन्हीं कर्मचारियों को स्वीकृत होता है, जो राज. सरकार के लिए किसी हानिकारक संयत्रों या हानिकारक प्रयोगशाला में नियुक्त हो। ये अवकाश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ही लागु होता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 106 -नियम 105 के अवकाश उन्हीं कर्मचारियों को स्वीकृत होते है जिनका वेतनमान 12000 रू तक देय हो। (दिनांक 01.01.2007 से लागु) दिनांक 12.09.2008 के आधार पर सभी वेतन वृद्धियां मान्य।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 108 – अवकाश की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का संयोजन –

चिकित्सालय अवकाश अन्य प्रकार के अवकाश के संयोजन में स्वीकृत किये जा सकते है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 109 – अध्ययन अवकाश –

यह नियम केवल अध्ययन अवकाश से सम्बन्धित है। सरकार के निर्देश पर किसी विशेष कार्य को करने या तकनीकी सेवाओं से सम्बन्धित अनुसंधान के लिए विदेश में प्रतिनियुक्त किये गये कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होते है। ऐसे प्रकरण नियम 51 के अन्तर्गत गुणावगुण के आधार पर निस्तारित किए जायेंगें।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 110 – अध्ययन अवकाश की देयता –

* किसी भी कर्मचारी को अपने सम्पूर्ण सेवा काल में अधिकतम 02 वर्ष का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। एक बार में अधिकतम 12 माह का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 112 – अध्ययन अवकाश स्वीकृत करने की शर्तें –

अध्ययन अवकाश राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों को देय है। अस्थायी कर्मचारी जो विभाग में न्यूनतम 03 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हो तथा ऐसी अस्थायी नियुक्तियां आरपीएससी की अभिशंषा के आधार पर होनी अनिवार्य है। 20 वर्ष से ज्यादा सेवा पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश देय नहीं होता है। अध्ययन अवकाश के दौरान विभाग से अनुपस्थिति- 24 माह + 04 माह (खाते के अवकाश) – 28 माह 24 माह + 06 माह (असाधारण अवकाश): 30 माह अध्ययन अवकाश के दौरान सदैव अर्द्ध वेतन मिलता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 113 – अध्ययन अवकाशों की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का समायोजन –

एक कर्मचारी को यदि किसी अन्य अवकाश के साथ अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जाता है तो उसे अपना अध्ययन अवकाश ऐसे समय पर लेना चाहिए जिससे वह अपने अवकाश खाते में उतना बैलेंस बनाएं रख सके जो उसके सेवा पर लौटने तक के लिए पर्याप्त हो। ?? शैक्षिक समाचार ?? नियम 114 – अध्ययन अवधि के अध्ययन अवकाश से ज्यादा होने पर प्रक्रिया – * कर्मचारी अपने खाते के अवकाश या असाधारण अवकाश ले सकता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 115 – अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन पत्र –

अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन पत्र लेखाधिकारियों या सहायक लेखाधिकारियों को दिये जाते है। आगे की स्वीकृति के लिए लेखाधिकारी जांच के बाद आवेदन पत्र विभागाध्यक्ष को भेजता है। *?? शैक्षिक समाचार ??* नियम 116 – अध्ययन अवकाशों के साथ अन्य अवकाशों का समायोजन – * यूरोप या अमेरिका में अवकाश का उपभोग कर रह कोई कर्मचारी यदि इस अवकाश के दौरान कोई पाठ्यक्रम करना चाहे तो और इसके लिए अपने अवकाश के किसी भाग को अध्ययन अवकाश में परिवर्तित करवाना चाहे तो अध्ययन प्रारम्भ करने से पूर्व उसे अपने प्रस्तावित अध्ययन कार्यक्रम को पाठ्यक्रम के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 117 – अध्ययन भत्ता –

यदि कर्मचारी के द्वारा किया जा रहा अध्ययन सरकारी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो तो सरकार कर्मचारी को अध्ययन अवधि के दौरान अलग से अध्ययन भत्ता स्वीकृत कर सकती है।

?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 118 – अध्ययन अवकाश के दौरान विश्रामकाल –

इस नियम के तहत कर्मचारी को अध्ययन अवधि के दौरान सरकार द्वारा 14 दिन का विश्रामकाल देय होता है।

* शैक्षिक समाचार *

उपयोगी किताबे

स्काउट गाइड -ज्योति 
बाल संस्कार शाला (मार्गदर्शिका)
बालकों का भावनात्मक निर्माण
बाला भवन और अधिगम Aid
मैदानांची मापे व रेखाटन
शिक्षण सहायक सामग्री पुस्तक
देश भक्ति गीत 

Order/Circular

राजस्थान विधानसभा आम चुनाव 2018 – आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन रोकने के सम्बन्ध में
विधानसभा आम चुनाव, 2018 – बिना अनुमति के अवकाश/मुख्यालय नहीं छोड़ने के सम्बन्ध में
नियमितीकरण व स्थायीकरण के सम्बंध में आकस्मिक अवकाश गणना date 07-02-2013
पत्राचार या प्राइवेट अध्ययन द्वारा सार्वजानिक परीक्षा में बैठने के लिए विभागीय अनुमति की आवश्यकता नहीं।केवल सूचित करना आवश्यक। नवीनतम आदेश date 17-03-2018
Private school fees rule 2017
national education policy 1986
rajasthan voluntary rural rule
राजस्थान सेवा नियम एवं समर्पित अवकाश की देयता
कक्षा एक मैं प्रेवश हेतु न्यूनतम Age

Excel Sheet


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  1. increment 28-06-2019 Excel Format
  2. fitment 2nd to 1st grade word file
  3. आयकर गणना प्रपत्र वर्ष 2018 -19 with 10E, 89(1) Form  on 24-12-18
  4. 7th pay fixation Arear 40% PriPay manager 7-10-2018
  5. DA Arrear 9% update 7-10-18
  6.  MDM easy Programme UPDATE 29-09-2018
  7. 7th pay fixation Arear III 40% 7-10-18
  8. 7th pay fixation Arear Unlock 29-9-18

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