छात्रवृत्ति सम्बन्धी / प्रोत्साहन योजना फॉर्म प्रपत्र

  1. समस्त प्रकार की पूर्व मैट्रिक छात्रवृतियों के लिए सत्र 2018 -19 हेतु आवेदन पत्र एवं विस्तृत दिशा-निर्देश
  2. प्री-कारगिल,पोस्ट कारगिल एवं भूतपूर्व सैनिकों के पुत्र/पुत्रियों के लिए सत्र 2018 -19 हेतु छात्रवृतियों के आवेदन एवं विस्तृत दिशा-निर्देश
  3. गार्गी पुरस्कार हेतु आवेदन पत्र
  4. आपकी बेटी योजना फॉर्म 
  5. शारीरिक अक्षमतायुक्त (दिव्यांग) छात्राओं हेतु आर्थिक सबलता पुरस्कार 
  6. पालनहार योजना हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप
  7. स्कूटी योजना फॉर्म 18-19
  8. लैपटॉप प्राप्ति रसीद
  9. हितकारी निधि से राज्य कर्मचारियों के बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा में अध्ययनरत होने पर वित्तीय सहायता हेतु प्रार्थना पत्र
  10. राष्‍ट्रीय शिक्षक कल्‍याण प्रतिष्‍ठान भारत सरकार द्वारा राज्‍य के राजकीय/अराजकीय विद्यालयों में कार्यरत अध्‍यापकों के बच्‍चों को व्‍यवसायिक शिक्षा में अध्‍ययनरत होने पर वित्‍तीय सहायता हेतु प्रार्थना-पत्र आमंत्रण

समूह दुर्घटना बीमा (GPA) योजना हेतु प्रपत्र

  1. समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा हेतु प्रस्ताव प्रपत्र -GPA Proposal Form (Govt.Servant)
  2. समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना दावा प्रपत्र (मृत्यु के अतिरिक्त)-GPA Claim Form (Other Than Death Govt.Servant)
  3. समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना हेतु प्रस्तावित कर्मचारियों की विवरण सारणी- GPA Covering List (Govt.Servant)
  4. समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना हेतु दावा प्रपत्र (मृत्यु की दशा में)- GPA Death Claim Form (Govt.Servant)
  5. समूह व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना हेतु कटौती पत्र – GPA Deduction Schedule (Govt.Servant)
  6. विद्यार्थी सुरक्षा दुर्घटना बीमा योजना का दावा प्रपत्र (राज. विद्यालय)- Student GPA GOVT CLAIM FORM

उपयोगिता प्रमाण पत्र – विभिन्न मद 

  1. CRC ग्रांट उपयोगिता प्रमाण पत्र विद्यालय/peeo/जिला स्तर -समसा

मेडीक्लेम बीमा पॉलिसी

राजस्थान सरकारमेडीक्लेम बीमा पॉलिसी

1. सामान्य परिचय – मेडिक्लेम पॉलिसी 1-1.2004 एवं उसके पश्चात नियुक्त राज्य कार्मिकों पर लागू है। इसके तहत् कार्मिक एवं परिजनों को निर्धारित अधिकतम बीमाधन की सीमा तक इण्डोर रहकर ईलाज करवाने की सुविधा प्रदान की जाती है। राज्य सेवा में नियमित भर्ती की दिनांक से राज्यकर्मी इस पाॅलिसी का लाभ प्राप्त करने का अधिकारी हो जाता है। अर्थात प्रोबेशन अवधि में भी राज्यकर्मी को मेडिक्लेम पाॅलिसी के समस्त लाभ प्राप्त हो जाते है।

2. प्रीमियम एवं बीमाधन – राज्यकर्मियों के लिए समस्त प्रीमियम राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाता है। प्रायः कार्मिकों में यह धारणा रहती है कि उसके वेतन से प्रीमियम राशि की कटौती होती है। इस जानकारी के अभाव में कार्मिकों द्वारा न्यायिक वाद भी दायर कर दिये जाते है। वर्तमान में राज्यकर्मियों की मेडिक्लेम पाॅलिसी में बीमाधन की अधिकतम सीमा 3 लाख रूपये निर्धारित है। बीमित व्यक्ति अपने एवं अपने परिजनों के ईलाज के लिए एक पाॅलिसी वर्ष में अधिकतम रूपये 3 लाख तक की चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकता है।

3. परिवार – मेडिक्लेम पाॅलिसी की परिवार की परिभाषा में कार्मिक के पति/पत्नि, 21 वर्ष तक आयु की अविवाहित 2 संताने एवं आश्रित माता-पिता जो प्रायः कार्मिक के पदस्थापन के स्थान पर साथ रहते है एवं जिनकी औसत मासिक आय 2000/- से कम है, शामिल किये जाते है।

4. चिकित्सालय – मेडिक्लेम पाॅलिसी के अन्तर्गत कार्मिक तीन तरह के चिकित्सालयों में ईलाज की सुविधा प्राप्त कर सकता है।

  •  राज्य में स्थित सभी राजकीय चिकित्सालय
  •  राज्य के बाहर अनुमोदित चिकित्सालय
  •  अनुमोदित निजि चिकित्सालय

पाॅलिसी के अन्तर्गत विभाग द्वारा उन्हीं चिकित्सालयों को अनुमोदित किया गया है जो सिविल सर्विसेज मेडिकल अटेन्डेंस रूल 2013 के तहत् राज्य सरकार द्वारा अनुमोदित है। सभी अनुमोदित चिकित्सालयों द्वारा राज्य सरकार एंव विभाग को सी.जी.एच.एस. पैकेज एवं दरों पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करनें की अण्डरटेकिंग दी हुई है, अतः वे सी.जी.एच.एस. दरों पर चिकित्सा सुविधा प्रदान करने हेतु बाध्य है। अनुमोदित चिकित्सालयों की अपडेटेड जानकारी वित्त विभाग की वेबसाईट पर उपलब्ध है।

5.  इन्डोर अवधि – मेडिक्लेम पाॅलिसी का लाभ प्राप्त करने के लिये 24 घंटे से अधिक अस्पताल में भर्ती रहना आवश्यक है। 24 घंटे से कम भर्ती रहकर करवाये गये ईलाज के कोई पुर्नभरण देय नहीं होगा।

6.  डे-केयर सुविधा – कुछ बीमारियां ऐसी है जिनमें 24 घंटे भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं है जिसे डे-केयर के नाम से जाना जाता है, इनमें भी पुनर्भरण की सुविधा प्राप्त है जैसे – डायलेसिस, कीमोथेरेपी, रेडियोथैरेपी, आंख की सर्जरी दुर्घटना की स्थिति में दांत की सर्जरी, किडनी स्टोन को हटाना, डी एण्ड सी आदि।

7.  पुनर्भरण की दर – बीमित कार्मिक को दावा राशि का पुनर्भरण सी.जी.एच.एस. के पैकेज दरों पर किया जावेगा। राज्य में किसी भी अनुमोदित निजि अस्पताल में ईलाज पर जयपुर शहर की सी.जी.एच.एस. दरें लागू होगी। राज्य के बाहर ईलाज करवाये जाने पर संबंधित शहर की सी.जी.एच.एस. दरें लागू होगी।

8.  कैशलेस सुविधा (नकदविहीन सुविधा) – नकदविहीन सुविधा का तात्पर्य है कि बीमित कार्मिक को ईलाज के समय अनुमोदित निजि चिकित्सालय में भुगतान नहीं करना पडता है। ईलाज की राशि का भुगतान विभाग द्वारा संबंधित चिकित्सालय का किया जाता है। मेडिक्लेम पाॅलिसी के अन्तर्गत यह सुविधा निम्न गंभीर बीमारियों तक ही सीमित है।

Caronary Artery Surgery

Cancer

Renal Failure i.e. Failure of Both Kidneys

Stroke

Multiple Sclerosis

Meningistis

Major Organ Transplant like kidney, Lung Pancreas, Bone marrow.

9.  प्री हाॅस्पिटलाईजेशन सुविधा – इसका तात्पर्य उस अवधि से है जिसमें बीमित भर्ती रहकर ईलाज करवाने से पूर्व आउटडोर ईलाज करवाता है। इस पाॅलिसी के अन्तर्गत भर्ती रहकर ईलाज करवाने के 30 दिन पूर्व तक आउटडोर ईलाज का पुनर्भरण प्राप्त किया जा सकता है।

10.  पोस्ट हाॅस्पिटलाईजेशन – यह वह अवधि होती है जिसमें बीमित अस्पताल से डिस्चार्ज होने के पश्चात चिकित्सा सुविधा प्राप्त कर सकता है। इस मेडिक्लेम पाॅलिसी में बीमित अस्पताल से डिस्चार्ज के पश्चात के 45 दिन के ईलाज खर्च का पुनर्भरण प्राप्त कर सकता है।

11.  मैटरनिटी लाभ – इस पाॅलिसी के अन्तर्गत बीमित कार्मिक अधिकतम प्रथम दो जीवित संतानों तक मेटरनिटी लाभ प्राप्त कर सकता है। एक पाॅलिसी वर्ष में मैटरनिटी लाभ की अधिकतम सीमा 50 हजार रूपये निर्धारित है। मैटरनिटी लाभ की सीमा निम्नानुसार है।

  • सामान्य प्रसव – अधिकतम 10 हजार रू 
  • सीजेरियन प्रसव – अधिकतम 20 हजार रू
  • जटिल प्रसव – अधिकतम 50 हजार रू

(50 हजार की सीमा में चाईल्ड केयर भी शामिल है।)

वे परिस्थितियां जिनमें बीमित कार्मिक को मेडिक्लेम पाॅलिसी का लाभ नहीं मिल सकता है।

  1. आउटडोर ईलाज
  2. सामान्य परिस्थितियों में गैर अनुमोदित चिकित्सालय में ईलाज
  3. ऐसी जांचे जिनमें बीमित द्वारा 24 घंटे भर्ती रहकर ईलाज नहीं करवाया है।
  4. जानबूझकर स्वयं को नुकसान पहुंचाने वाले कृत्य, नशीले एवं जहरीले पदार्थों के सेवन से उत्पन्न बीमारी की स्थिति
  5. आंखो के चश्में, कान में लगाये जाने वाले उपकरण
  6. सौन्दर्य बढाने हेतु दांतों की सर्जरी एवं प्लास्टिक सर्जरी
  7. विटामिन एवं टाॅपिक का पुनर्भरण
  8. प्राकृतिक चिकित्सा
  9. जन्मजात विकृतियां एवं बीमारियां
  10. परमाणु यु़द्ध से उत्पन्न होने वाली बीमारियां आदि

पेंशन नियम एवं ग्रेच्युटी

पेंशन नियम एवं ग्रेच्युटी
वर्तमान में राज्य कर्मचारियों के लिये दो प्रकार के पेंशन नियम लागू है :
(1) 1-1-2004 से पूर्व नियुक्त कर्मचारी (31-12-2003 तक)
“राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996”
(2) 1-1-2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारी
“नई पेंशन अंशदान योजना 2004”
(1) पेंशन नियम-1996
कर्मचारी को सेवानिवृत्ति की दिनांक के दूसरे दिन ही पेंशन परिलाभ का भुगतान करने का प्रावधान है ।
कार्यालय अध्यक्ष कर्मचारी को सेवानिवृत्ति तिथि से छ: माह पूर्व समस्त प्रकरण (सेवा पुस्तिका एवं पेंशन कुलक वांछित प्रमाणपत्रों सहित) पेंशन विभाग को अधिकृतियां जारी करने हेतु अनिवार्य रूप से प्रेषित कर दिया जावे । कर्मचारी स्वयं अपने प्रकरण के प्रति जागरुक रहे जैसे जन्म तिथि एवं पूरे सेवाकाल का सत्यापन,मनोनयन पत्र, लिये गये ऋणों का अदेय प्रमाणपत्र इत्यादि।
पेंशन का वर्गीकरण
(१) अधिवार्षिकी पेंशन – अनिवार्य सेवा निवृत्ति की आयु प्राप्त करने पर पेंशन (वर्तमान में 60 वर्ष )
(२) निवृत्ति पेंशन – (अ) नियम 50 (1) के अन्तर्गत स्वेच्छिक सेवा निवृत्ति जो 15 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने के बाद किसी भी समय वह नियुक्ति अधिकारी को न्यूनतम तीन माह का नोटिस देकर ले सकता है ।
स्वेच्छिक सेवा निवृत्ति पर अर्हकारी सेवा 5 वर्ष की अवधि तक इस शर्त के अध्यधीन रहते हुए बढ़ाई जायेगी कि उसकी कुल अर्हकारी सेवा किसी भी दशा में 33 वर्ष से अधिक नहीं होगी तथा वह उसकी अधिवार्षिकी आयु के बाद समाप्त नहीं होगी । पेंशन योग्य सेवा में 5 वर्ष का लाभ बढ़ाने से इस अवधि की कोई वेतन वृद्धि
देय नहीं होगी ।
(ब) नियम 53 (1) के अनुसार सरकारी कर्मचारी द्वारा 15 वर्ष की अर्हकारी सेवा पूर्ण करने या 50 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) पूर्ण करने पर अनिवार्य सेवा निवृत्त किया जाता है तो उसे निवृत्त पेंशन प्राप्त होगी । इसमें 5 वर्ष की प्रकल्पित अर्हकारी सेवा नहीं जोड़ी जायेगी ।
(3) असमर्थता पेंशन –
शारीरिक या मानसिक दुर्बलता के कारण कार्य करने असमर्थ होने पर चिकित्सा अधिकारी के प्रमाणपत्र पर देय।
(4) क्षतिपूरक पेंशन –
स्थाई पद समाप्त होने के कारण सेवामुक्ति के चयन किये जाने पर देय ।
(5) अनिवार्य सेवानिवृत्ति पेंशन
नियम 42 के अन्तर्गत दण्ड स्वरूप अनिवार्य सेवानिवृत्ति किये जाने पर यह पेंशन देय ।
पेंशन फार्मूला
पेंशन योग्य सेवा गणना कुल 33 वर्ष ही मानी गई है और अधिकतम पेंशन वेतन परिलब्धियों का 50 प्रतिशत देय है कम सेवा होने पर अनुपातिक पेंशन देय है ।
पेंशन राशि= अंतिम वेतन परिलब्धियाँ/2 x
छ: माही अवधि/66
नोट :- छः माही अवधि अधिकतम 66 मान्य है । पूरे तीन माह से छ: माह की अवधि एक छ: माही मानी जाती है ।
तीन माह से कम सेवा अवधि जैसे 29 वर्ष 2 माह 15 दिन के लिये 58 छः माही मानी जायेगी
पेंशन का रूपान्तरण
1. सेवा निवृत्त कर्मचारी अपनी मूल पेंशन की अधिकतम एक तिहाई या ऐसी निचली सीमा को रूपान्तरित करा सकता है ।
2. सेवा निवृत्ति की तिथि के एक वर्ष की अवधि के भीतर प्रपत्र एक में बिना चिकित्सा प्रमाणपत्र के आवेदन किया जा सकता है ।
3. रूपान्तरण राशि की गणना आगामी जन्म तिथि पर पूर्ण होने वाले वर्षों के अनुसार रूपान्तर फेक्टर के आधार पर देय होगी ।
4. रूपान्तरण राशि का सूत्र
= 1/3 पेंशन x 12 x रूपान्तरण फेक्टर
यदि एक कर्मचारी 60 वर्ष की आयु पर सेवा निवृत्त होता है तो रूपांतरण फेक्टर 9.81 होगा क्योंकि उसकी आगामी जन्मतिथि पर आयु 61 वर्ष की होगी।
5. रूपान्तरण राशि का पुनः स्थार्पन (रेस्टोरेशन) रूपान्तरण भुगतान की तिथि से 14 वर्ष पूरे होने के बाद अगले माह से पुनः पूर्ण पेंशन दे दी जायेगी ।
परिवार पेंशन
पारिवारिक पेंशन 1913/- प्रतिमाह के न्यूनतम और 1-7-2004 से सरकार के उच्चतम वेतन रूपये 33,600/- के 30% के अधिकतम रहते हुए परिलब्धियों का 30 % अनुझेय होगा ।
ग्रेच्यूटी
ग्रेच्युटी सेवानिवृत्ति पर दी जाने वाली ग्रेच्युटी की अधिकतम राशि 10 लाख है ।
ग्रेच्युटी सूत्र= अंतिम वेतन परिलब्धियाँ/4 x छ: माही अवधि
(2) नई पेंशन अंशदान योजना 2004
1. राज्य सरकार द्वारा 1-1-2004 तथा इसके पश्चात् नियुक्त समस्त राज्य कर्मचारियों पर यह योजना लागू होगी।
2. इस योजना में कर्मचारी को प्रतिमाह मूल वेतन, मंहगाई वेतन एवं मंहगाई भत्ते का 10 % पेंशन अंशदान के रूप में जमा कराना होगा । राज्य सरकार द्वारा समकक्ष अंशदान की राशि सम्बन्धित संवेतन के बजट में भारित कर
जमा करवाई जायेगी ।
3. यह राशि ब्याज सहित निजी निक्षेप खाते में जिला कोषालय में जमा कराई जायेगी ।
4. अंशदायी पेंशन के निजी निक्षेप खाते में जमा राशि पर 8% की दर से वार्षिक ब्याज देय होगा ।
5. 1-1-2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारियों के अलग से वेतन विपत्र बनाया जायेगा ।
6. निजी निक्षेप खातों का संचालन निदेशक, राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग द्वारा किया जायेगा ।
(विस्तृत विवरण शिविरा पत्रिका के अगस्त, सितम्बर 2004 के अंक में है ।)

अवकाश नियम

नियम-93 1-अर्द्ध-वेतन एवं रूपांतरित अवकाश की देयता-

1-1-राज्य कर्मचारी को प्रत्येक पूर्ण वर्ष की सेवा पर 20 दिन का अर्द्ध-वेतन अवकाश प्राप्त होगा।

1-2-कर्मचारी को देय अर्द्ध-वेतन अवकाश चिकित्सा-प्रमाण-पत्र या निजी कारणों से स्वीकृत किए जा सकते हैं।

2-एक स्थाई कर्मचारी उसको देय अर्द्ध-वेतन अवकाशों की आधी संख्या तक रुपांतरित(commuted) अवकाश अपनी स्वयं की बीमारी के आधार पर स्वीकृत करा सकता है (अर्द्ध-वेतन अवकाशों का आधी संख्या में पूर्ण वेतन पर रूपान्तरण)। इसके लिए कर्मचारी को एक प्राधिकृत चिकित्सक से रोग-प्रमाण-पत्र(sickness certificate) प्राप्त कर प्रस्तुत करना होगा।

रुपांतरित अवकाश स्वीकृति की शर्तें-

1- कर्मचारी को रुपांतरित अवकाश स्वीकृत करने पर उसके अवकाश लेखों से दुगुनी संख्या में अर्द्ध-वेतन अवकाश घटा(debit) दिए जाएंगे।

2-1 अवकाश स्वीकृतिकर्ता अधिकारी को इस बात से संतुष्ट होना चाहिए कि अवकाश समाप्ति पर उस कर्मचारी के सेवा पर उन्हें उपस्थित होने की पूर्ण संभावना है।

2-2 देय अर्द्ध-वेतन अवकाशों में से 180 दिन तक के अर्द्ध-वेतन अवकाशों को एक समय में चिकित्सक के प्रमाण पत्र के बिना, सार्वजनिक हित में अनुमोदित पाठ्यक्रम के लिए, रुपांतरित अवकाशों के रूप में स्वीकृत किया जा सकता है।

3-किसी स्थाई कर्मचारी को अदेय अवकाश(Leave not due) स्वीकृत किए जाने की शर्तें इस प्रकार है-

3-1- अवकाश स्वीकृत करने वाला प्राधिकारी संतुष्ट हो कि वह कर्मचारी अदेय अवकाशों की समाप्ति के बाद सेवा पर पुनः उपस्थित हो जाएगा,

3-2- अदेय अवकाशों की संख्या उस अनुमानित संख्या तक ही होनी चाहिए जो कर्मचारी द्वारा अवकाश से लौटकर अर्द्ध-वेतन अवकाश के रूप में अर्जित की जा सके,

3-3- कर्मचारी के संपूर्ण सेवा काल में अधिकतम 360 दिन का अदेय अवकाश दिया जा सकेगा। एक बार में 90 दिन तक तथा चिकित्सा-प्रमाण-पत्र के आधार के अतिरिक्त अन्य आधार पर 180 दिन तक का ही अदेयअवकाश स्वीकृत किया जा सकेगा।

3-4-अदेय अवकाश करमचारी के अर्द्ध-वेतन अवकाश के खाते में डेबिट किए जाएंग तथा उन्हें कर्मचारी द्वारा भविष्य में अर्जित किए जाने वाले अर्द्ध-वेतन अवकाश से समायोजित किया जाएगा।

4- एक कर्मचारी जिसे संबंधित सेवा नियमों के अंतर्गत अथवा सेवा नियम नहीं होने पर सक्षम राजकीय आदेश के अंतर्गत अस्थाई रूप से नियुक्त किया गया है तथा जो उस पद की शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव की पात्रता पूर्ण करता है, उसे 3 वर्ष की सेवा पूर्ण करने के पश्चात रुपांतरित अवकाश तथा अदेय अवकाश स्वीकृत किए जा सकेंग।

5-यदि किसी कर्मचारी को रुपांतरित अवकाश अथवा अदेय अवकाश स्वीकृत किया गया हो और उसकी सेवा में रहते हुए मृत्यु हो जाए अथवा उसे राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम 1996 के नियम 35 के अंतर्गत असमर्थता के आधार पर सेवानिवृत कर दिया जाए तो अवकाश वेतन संबंधी कोई वसूली नहीं की जाएगी। अन्य मामलों जैसे त्यागपत्र, स्वैच्छिक सेवानिवृति, सेवा से निष्कासन या बर्खास्तगी आदि में अवकाश वेतन की नियमानुसार वसूली की जाएगी।

नियम 94 – सेवा समाप्ति अवकाश –

ऐसे अवकाश सामान्य तौर पर अस्थाई कर्मचारियों को ही स्वीकृत किये जाते है। सक्षम अधिकारी ऐसे अवकाशों को अपने विवेक के आधार पर स्वीकृत कर सकता है। इस नियम के तहत शिक्षार्थी को यह लाभ देय नही होता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 95 – अवकाश अवधि सेवा व्यवधान नही है –

सामान्य तौर पर यदि कोई अस्थायी कर्मचारी अपने पद के समान संवर्ग में ही स्थायी रूप से नियुक्त है तो उसकी पिछली सेवा अवकाश अवधि के तहत माना जायेगा।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 96 – असाधारण अवकाश –

साधारण तौर पर कर्मचारी असाधारण अवकाश तभी स्वीकृत कराता है, जब उसके अवकाश खाते में किसी भी तरह के अवकाश शेष न हो। दिनांक 26.02.2002 के बाद अस्थायी कर्मचारी को असाधारण अवकाश तभी मिलता है, जब उसने 03 वर्ष की सेवा की है। अस्थायी कर्मचारियों को अधिकतम 18 माह का असाधारण अवकाश देय है। दिनांक 01.01.2007 के बाद परिवीक्षाधीन अवधि में अधिकतम 03 माह का असाधारण अवकाश देय है। विपरीत परिस्थितियों में असाधारण अवकाश परिवीक्षाधीन कर्मचारियों को 03 माह से अधिक भी स्वीकृत है। 03 माह से अधिक यदि कोई कर्मचारी असाधारण अवकाश ले तो अधिक ली गई अवधि उसके परिवीक्षाधीन काल को प्रभावित करती है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 99 – विशेष असमर्थता अवकाश -(दिनांक 14.12.12 के बाद) घर से कार्यालय व कार्यालय से घर ड्यूटी नही माना गया है। दिनांक 18.05.2010 के बाद चुनाव में ड्यूटी घर से निकलते ही मानी जाती है। इस नियम के तहत सरकारी कर्मचारी को कार्यस्थल पर यदि कोई क्षति हो जाती है तो क्षति होने के तीन माह तक आवेदन पत्र देकर विशेष असमर्थता अवकाश का लाभ उठा सकता है। सामान्य तौर पर विशेष असमर्थता अवकाश अधिकतम 24 माह तक देय होता है। यदि 24 माह उपरांत भी कर्मचारी की स्थिति में कोई सूधार न हो तो चिकित्सा रिपोर्टो के आधार पर अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है। *विशेष असमर्थता अवकाश के दौरान वेतन* – उच्च सेवा में 120 दिन अवकाश- पूर्ण वेतन उच्च सेवा में 120 दिन से अधिक अवकाश- अर्द्ध वेतन चतुर्थ श्रेणी सेवा मंे 60 दिन अवकाश- पूर्ण वेतन चतुर्थ श्रेणी सेवा में 60 दिन से अधिक अवकाश- अर्द्ध वेतन

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 100 – असमर्थता अवकाश

इसके के दौरान सरकार द्वारा कोई क्षतिपूर्ति भत्ता स्वीकृत होने पर वेतन में कटौती – इस नियम के तहत यदि असमर्थता अवकाश के दौरान क्षतिपूर्ति भत्ता मिले तो भत्ते के बराबर की राशि कर्मचारी के वेतन में से काट ली जाती है। कर्मचारी के व्यक्तिगत बीमा दावों पर इस नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 103 – प्रसुति अवकाश -*

(दिनांक 06.12.2004 से प्रभावी) महिला कर्मचारियों को सम्पूर्ण सेवाकाल में 02 बार अधिकतम 180 दिन का प्रसुति अवकाश मिलता है। 02 बार के बाद भी कोई संतान जीवित न हो तो एक बार और मिल सकता है। दिनांक 11.10.2008 के बाद प्रसुति अवकाश अवधि 135 दिन से बढ़कर 180 दिन की गई है। दिनांक 06.12.2004 के बाद ये अवकाश अस्थायी महिला कर्मचारी को भी देय है। किसी भी कर्मचारी को पूर्ण वेतन व भत्ते देय है। सामान्य तौर पर गर्भपात पर यह अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा सकता है। चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर विपरीत परिस्थितियों में 06 सप्ताह तक का अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। (दिनांक 14.07.2006 के बाद से)

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 103(अ) – पितृत्व अवकाश –

(दिनांक 06.12.2004 से) किसी पुरूष के प्रथम दो संतानों पर उसे बच्चे के जन्म के 15 दिन पूर्व व 03 माह के भीतर 15 दिन का अवकाश मिलता है।

*नियम 103(ब) – दत्तक अवकाश – * (दिनांक 07.12.2011 से) किसी महिला कर्मचारी को 180 दिन का अवकाश सेवाकाल में दो बार ही।01 साल से कम आयु के बच्चे को गोद लेने पर मिलता है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 104 – प्रस्तावित अवकाश की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का संयोजन – * प्रसूति/पितृत्व अवकाश किसी भी प्रकार के अवकाश से संयोजित कर स्वीकृत किए जा सकते है।

*?? शैक्षिक समाचार ??*

*नियम 105 – पृथक श्रेणी का अवकाश/चिकित्सालय अवकाश की सीमा –

सामान्य तौर पर यह अवकाश उन्हीं कर्मचारियों को स्वीकृत होता है, जो राज. सरकार के लिए किसी हानिकारक संयत्रों या हानिकारक प्रयोगशाला में नियुक्त हो। ये अवकाश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को ही लागु होता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 106 -नियम 105 के अवकाश उन्हीं कर्मचारियों को स्वीकृत होते है जिनका वेतनमान 12000 रू तक देय हो। (दिनांक 01.01.2007 से लागु) दिनांक 12.09.2008 के आधार पर सभी वेतन वृद्धियां मान्य।

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नियम 108 – अवकाश की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का संयोजन –

चिकित्सालय अवकाश अन्य प्रकार के अवकाश के संयोजन में स्वीकृत किये जा सकते है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 109 – अध्ययन अवकाश –

यह नियम केवल अध्ययन अवकाश से सम्बन्धित है। सरकार के निर्देश पर किसी विशेष कार्य को करने या तकनीकी सेवाओं से सम्बन्धित अनुसंधान के लिए विदेश में प्रतिनियुक्त किये गये कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होते है। ऐसे प्रकरण नियम 51 के अन्तर्गत गुणावगुण के आधार पर निस्तारित किए जायेंगें।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 110 – अध्ययन अवकाश की देयता –

* किसी भी कर्मचारी को अपने सम्पूर्ण सेवा काल में अधिकतम 02 वर्ष का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है। एक बार में अधिकतम 12 माह का अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जा सकता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 112 – अध्ययन अवकाश स्वीकृत करने की शर्तें –

अध्ययन अवकाश राज्य सरकार के सभी कर्मचारियों को देय है। अस्थायी कर्मचारी जो विभाग में न्यूनतम 03 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हो तथा ऐसी अस्थायी नियुक्तियां आरपीएससी की अभिशंषा के आधार पर होनी अनिवार्य है। 20 वर्ष से ज्यादा सेवा पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को अध्ययन अवकाश देय नहीं होता है। अध्ययन अवकाश के दौरान विभाग से अनुपस्थिति- 24 माह + 04 माह (खाते के अवकाश) – 28 माह 24 माह + 06 माह (असाधारण अवकाश): 30 माह अध्ययन अवकाश के दौरान सदैव अर्द्ध वेतन मिलता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 113 – अध्ययन अवकाशों की निरन्तरता में अन्य अवकाशों का समायोजन –

एक कर्मचारी को यदि किसी अन्य अवकाश के साथ अध्ययन अवकाश स्वीकृत किया जाता है तो उसे अपना अध्ययन अवकाश ऐसे समय पर लेना चाहिए जिससे वह अपने अवकाश खाते में उतना बैलेंस बनाएं रख सके जो उसके सेवा पर लौटने तक के लिए पर्याप्त हो। ?? शैक्षिक समाचार ?? नियम 114 – अध्ययन अवधि के अध्ययन अवकाश से ज्यादा होने पर प्रक्रिया – * कर्मचारी अपने खाते के अवकाश या असाधारण अवकाश ले सकता है।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 115 – अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन पत्र –

अध्ययन अवकाश के लिए आवेदन पत्र लेखाधिकारियों या सहायक लेखाधिकारियों को दिये जाते है। आगे की स्वीकृति के लिए लेखाधिकारी जांच के बाद आवेदन पत्र विभागाध्यक्ष को भेजता है। *?? शैक्षिक समाचार ??* नियम 116 – अध्ययन अवकाशों के साथ अन्य अवकाशों का समायोजन – * यूरोप या अमेरिका में अवकाश का उपभोग कर रह कोई कर्मचारी यदि इस अवकाश के दौरान कोई पाठ्यक्रम करना चाहे तो और इसके लिए अपने अवकाश के किसी भाग को अध्ययन अवकाश में परिवर्तित करवाना चाहे तो अध्ययन प्रारम्भ करने से पूर्व उसे अपने प्रस्तावित अध्ययन कार्यक्रम को पाठ्यक्रम के साथ प्रस्तुत करना चाहिए।

?? शैक्षिक समाचार ??

नियम 117 – अध्ययन भत्ता –

यदि कर्मचारी के द्वारा किया जा रहा अध्ययन सरकारी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो तो सरकार कर्मचारी को अध्ययन अवधि के दौरान अलग से अध्ययन भत्ता स्वीकृत कर सकती है।

?? शैक्षिक समाचार ??*

नियम 118 – अध्ययन अवकाश के दौरान विश्रामकाल –

इस नियम के तहत कर्मचारी को अध्ययन अवधि के दौरान सरकार द्वारा 14 दिन का विश्रामकाल देय होता है।

* शैक्षिक समाचार *

वेतनमान 2017 एवं वेतनमान 2008 से सम्बंधित प्रपत्र

  1. ऑप्शन फॉर्म – वेतनमान 2017
  2. फिक्सेशन स्टेटमेंट – वेतनमान 2017
  3. फिक्सेशन स्टेटमेंट – वेतनमान 2008 
  4. ऑप्शन फॉर्म – वेतनमान 2008

कार्यालय सम्बन्धी (Office Related)

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  2. fitment 2nd to 1st grade pdf
  3. fitment 3rd to 2nd pdf
  4. increment 6th pay com. Format pdf
  5. increment 28-06-2019 Formet.pdf
  6. increment Peeo staff Format pdf
  7. पे मेनेजर मास्टर डाटा फॉर्म (Pay Manager Master Data)
  8. वार्षिक कार्य मूल्याङ्कन (ACR) प्रपत्र राजपत्रित अधिकारी – MS Word By:- C P KURMI JI
  9. वार्षिक कार्य मूल्याङ्कन (ACR) प्रपत्र राजपत्रित अधिकारी – PDF
  10. वार्षिक कार्य मूल्याङ्कन (ACR) प्रपत्र अराजपत्रित अधिकारी – MS Word By:-C P KURMI JI.
  11. वार्षिक कार्य मूल्याङ्कन (ACR) प्रपत्र अराजपत्रित अधिकारी – PDF
  12. गत भुगतान पत्र (LPC) प्रपत्र – MS Excel By:- C P KURMI JI
  13. गत भुगतान पत्र (LPC) प्रपत्र – PDF
  14. GA-13 कार्यभार हस्तांतरण प्रपत्र
  15. GA – 100 कर्मचारियों के वेतन एवं यात्रा भत्तों का भुगतान पत्र
  16. GA – 141 निरन्तर एवं योग्य सेवा का प्रमाण पत्र
  17. PL फॉर्म – राज. सेवा नियमों के अंतर्गत अवकाश के आवेदन पत्र
  18. कार्यग्रहण काल के बदले उपार्जित अवकाश प्रपत्र
  19. 03 – Power सामान्य वित्तीय एवं लेखा नियमों के अंतर्गत 03 का अधिकार दिए जाने का प्रस्ताव पत्र
  20. वेतन के अलावा अन्य मद में बजट मंगवावे का फॉर्मेट ?
  21. अतिरिक्त बजट राशि आवंटन हेतु आवेदन फॉर्म 
  22. रिव्यू डीपीसी हेतु प्रपत्र Review DPC Format
  23. पात्रता सूची में आपत्ति हेतु आवेदन पत्र -II ग्रेड
  24. वरिष्ठता सूची में नामांकन/संशोधन/योग्यता अभिवृद्धि हेतु आवेदन पत्र का प्रारूप
  25. योग्यता अभिवृद्धि हेतु प्रपत्र क और ख
  26. सेवा विवरण प्रपत्र पीडीऍफ़ में 
  27. सेवा विवरण प्रपत्र MS-Word By:- C P KURMI JI
  28. स्वैच्छिक सेवा निवृति लेने हेतु प्रार्थना पत्र
  29. सेवानिवृत्ति हेतु शपथ पत्र प्रारूप 6
  30. सेटअप परिवर्तन हेतु आवेदन पत्र 
  31. विधालय आपदा प्रबंधन योजना प्रपत्र
  32. SIQE कक्षा अवलोकन प्रपत्र (संस्थाप्रधान द्वारा)

आयकर / टीडीएस से सम्बंधित प्रपत्र

  1.  Form 27 A
  2. PAN प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र Form 49A
  3.  TAN प्राप्त करने हेतु आवेदन पत्र Form 49B
  4.  चालान फॉर्म 280
  5.  चालान फॉर्म 281
  6. Form 10E

अन्य फॉर्म प्रपत्र

  1. मृत राज्य कर्मचारियों के आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति हेतु आवेदन पत्र